

सोचिए… एक 74 साल के बुजुर्ग की मौत होती है, अंतिम संस्कार की तैयारी होती है, लेकिन कहानी में ट्विस्ट तब आता है जब उनकी बेटियां पिता के अंतिम संस्कार में पहुंच ही नहीं पातीं।
बताया जा रहा है कि मुंबई के बड़े कपड़ा व्यापारी शिवचरण राम रतन गुप्ता की 4 अगस्त को सोनीपत के एक वृद्धाश्रम में मौत हुई थी। उनकी बेटियों को इसकी जानकारी दी गई और बेटी प्रिया ने अंतिम संस्कार के लिए ₹5,100 ऑनलाइन भेजकर वीडियो कॉल के जरिए पूरी प्रक्रिया देखने की बात कही।
लेकिन इसके बाद जो हुआ, उसने पूरे मामले को सवालों के घेरे में ला दिया।
पिता की अस्थियां लेकर उनके भाई महेंद्र और भतीजा बुधवार को हरिद्वार पहुंचे। बेटियां वहां भी नहीं पहुंचीं। परिवार की ओर से वजह बताई गई कि बेटी प्रिया को डर था कि सोनीपत में उनके साथ कोई अनहोनी न हो जाए, इसलिए वह वहां नहीं आईं।
इसके बाद दोनों ने सोनीपत के वृद्धाश्रम संचालक के साथ मिलकर शिवचरण की अस्थियां हरिद्वार में गंगा नदी में प्रवाहित कीं।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है—
आखिर ऐसा क्या डर था कि बेटियां अपने पिता के अंतिम संस्कार तक में शामिल नहीं हो सकीं?
क्या परिवार के बीच पहले से कोई विवाद था, या इसके पीछे कोई और वजह छिपी है?
फिलहाल सामने आई जानकारी कई सवाल जरूर खड़े करती है, लेकिन पूरे मामले की सच्चाई सामने आने के लिए संबंधित पक्षों और जांच की जानकारी का इंतजार जरूरी है।

