हरियाणा के भिवानी के ढाणी गांव की 19 साल की मनीषा… एक ऐसी लड़की, जो नर्सिंग ऑफिसर बनने का सपना देख रही थी। लेकिन 11 अगस्त 2025 को अचानक लापता हुई मनीषा की जिंदगी का सफर वहीं खत्म हो गया।

दो दिन बाद उसका शव गांव सिधानी के खेतों में मिला। पुलिस ने पहले मर्डर केस दर्ज किया, लेकिन कुछ ही दिनों बाद 18 अगस्त को इसे आत्महत्या बता दिया गया।
और यहीं से शुरू हुए वो सवाल, जिनका जवाब परिवार आज भी मांग रहा है।
मनीषा के पिता संजय अपनी बेटी को याद करते हुए भावुक हो जाते हैं। परिवार का कहना है कि मनीषा की मौत हत्या थी या आत्महत्या—इसकी सच्चाई अब तक सामने नहीं आई है।
मामला बढ़ा, विरोध हुआ और फिर तीसरी बार दिल्ली एम्स में पोस्टमार्टम कराया गया। इसके बाद जांच CBI को सौंप दी गई।
CBI की टीम गांव में कई बार पहुंचकर जांच कर चुकी है, लेकिन परिवार के मुताबिक मौत की असली वजह का रहस्य अभी भी बरकरार है।
आज मनीषा की बरसी पर गांव के मंदिर में श्रद्धांजलि सभा रखी गई। किसान नेता, पंचायत सदस्य और गांव के लोग वहां पहुंचे और परिवार के साथ खड़े नजर आए।
लेकिन इस पूरे मामले की सबसे दर्दनाक तस्वीर ये है कि—
एक बेटी चली गई… एक परिवार बिखर गया… जांच एजेंसियां जांच कर रही हैं… लेकिन पिता के मन में आज भी वही सवाल है—आखिर मेरी बेटी के साथ उस दिन हुआ क्या था?
मनीषा की मौत को एक साल पूरा हो चुका है, मगर न्याय की तलाश और मौत का रहस्य अभी खत्म नहीं हुआ है।
गांव की 19 साल की मनीषा… एक ऐसी लड़की, जो नर्सिंग ऑफिसर बनने का सपना देख रही थी। लेकिन 11 अगस्त 2025 को अचानक लापता हुई मनीषा की जिंदगी का सफर वहीं खत्म हो गया।
दो दिन बाद उसका शव गांव सिधानी के खेतों में मिला। पुलिस ने पहले मर्डर केस दर्ज किया, लेकिन कुछ ही दिनों बाद 18 अगस्त को इसे आत्महत्या बता दिया गया।
और यहीं से शुरू हुए वो सवाल, जिनका जवाब परिवार आज भी मांग रहा है।
मनीषा के पिता संजय अपनी बेटी को याद करते हुए भावुक हो जाते हैं। परिवार का कहना है कि मनीषा की मौत हत्या थी या आत्महत्या—इसकी सच्चाई अब तक सामने नहीं आई है।
मामला बढ़ा, विरोध हुआ और फिर तीसरी बार दिल्ली एम्स में पोस्टमार्टम कराया गया। इसके बाद जांच CBI को सौंप दी गई।
CBI की टीम गांव में कई बार पहुंचकर जांच कर चुकी है, लेकिन परिवार के मुताबिक मौत की असली वजह का रहस्य अभी भी बरकरार है।
आज मनीषा की बरसी पर गांव के मंदिर में श्रद्धांजलि सभा रखी गई। किसान नेता, पंचायत सदस्य और गांव के लोग वहां पहुंचे और परिवार के साथ खड़े नजर आए।
लेकिन इस पूरे मामले की सबसे दर्दनाक तस्वीर ये है कि—
एक बेटी चली गई… एक परिवार बिखर गया… जांच एजेंसियां जांच कर रही हैं… लेकिन पिता के मन में आज भी वही सवाल है—आखिर मेरी बेटी के साथ उस दिन हुआ क्या था?
मनीषा की मौत को एक साल पूरा हो चुका है, मगर न्याय की तलाश और मौत का रहस्य अभी खत्म नहीं हुआ है।

