26 जनवरी: तिरंगे का अपमान होने के बाद – किसान आंदोलन का विरोध शुरू

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26 जनवरी यानी गणतंत्र दिवस के दिन किसानों ने दिल्ली में ट्रैक्टर परेड का आह्वान किया था। मगर किसान आंदोलन की आड़ में आसामाजिक तत्वों व ख़ालिस्तान समर्थकों ने इस आंदोलन को एक अलग रूप दे दिया हैं। कल लालक़िले पर ख़ालिस्तान ज़िंदाबाद के नारे लगाएँ गये व तिरंगे झंडे का अपमान भी किया गया। बता दें की कोई जाती, धर्म या समुदाय किसी देश से बड़ा नहीं होता।

PTC न्यूज द्वारा जारी किए गये एक विडियो में एक व्यक्ति जोकी झंडा फहराने के लिए पाइप पर चढ़ रहा था, जब आसपास खड़े आंदोलनकारियों ने उस व्यक्ति को तिरंगा देना चाहा तो उस व्यक्ति ने तिरंगा फेंक दिया व दूसरा झंडा लेकर फहरा दिया। अब सवाल दूसरा झंडा फहराने का नहीं हैं बल्कि तिरंगे के अपनाम का हैं। अब आंदोलन के नाम पर देश की राजधानी दिल्ली में हुई इस हिंसा के बाद रेवाड़ी में भी किसानों का गुस्सा फूट पड़ा।


डूंगरवास व आसपास के करीब 20 गांव के ग्रामीणों ने पंचायत कर दिल्ली जयपुर संख्या 48 स्थित मसानी बैराज पर पिछले करीब डेढ़ माह से किसान आंदोलन के लिए बैठे आंदोलनकारियों को वहां पहुंच 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया है कि या तो वे हाईवे खाली कर दें अन्यथा ग्रामीण चुप नहीं बैठेंगे। बता दें कि ग्रामीण प्रदर्शन करते हुए दिल्ली जयपुर हाईवे स्थित मसानी बैराज पहुंचे और जोरदार विरोध प्रदर्शन भी किया।

ग्रामीणों के ग़ुस्से को देखकर पुलिस प्रशासन भी वहां पहुंच गया और आंदोलनकारियों व ग्रामीणों के बीच बातचीत के दौरान तनाव की स्थिति पैदा होती देख पुलिस प्रशासन ने ग्रामीणों को एक तरफ बुलाकर उनकी बात सुनी और आंदोलनकारियों से भी हाईवे खाली करने को कहा। किसानों का कहना हैं की डेढ़ महीने से मसानी बैराज पर किसान आंदोलन के नाम पर चल रहे इस धरना प्रदर्शन के कारण बिजली, पानी और आवाजाही सहित उनकी तमाम व्यवस्था चरमरा गई है। वही उनके खेतों में खड़ी फसल की हालत भी खराब हो चली है।

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