पंजाब में खालिस्तान विरोधी नेता गुरसिमरन सिंह मंड पर हमला… और अब इस हमले ने उनकी सुरक्षा व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मामला 7 अगस्त को अंबाला के पंजोखरा साहिब में हुए हमले का है। परिवार का आरोप है कि मंड को Y+ श्रेणी की सुरक्षा मिली हुई थी, लेकिन इसके बावजूद हमलावर उन तक पहुंच गए और तलवारों व ईंट-पत्थरों से हमला किया गया।
परिवार के मुताबिक, घटना के वक्त मंड के साथ 5 गनमैन मौजूद थे, जबकि मौके पर 8 सुरक्षाकर्मियों की तैनाती होनी चाहिए थी। आरोप है कि जब मंड और उनके बेटे पर हमला हो रहा था, तब कुछ सुरक्षाकर्मी उन्हें बचाने के बजाय खड़े होकर हंस रहे थे।
अब इस आरोप ने सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है—अगर Y+ सुरक्षा के बावजूद किसी नेता पर हमला हो जाए, तो आखिर सुरक्षा में चूक कहां हुई?
मंड के मुताबिक, घटना से जुड़े मारपीट के वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय ने CRPF के दो जवानों को मुख्यालय तलब किया है। हालांकि, दोनों जवानों के खिलाफ विभागीय स्तर पर क्या कार्रवाई हुई है, इसकी आधिकारिक जानकारी अभी सामने नहीं आई है।
तो अब सबसे बड़ा सवाल यही है—हमलावरों ने सुरक्षा घेरा कैसे तोड़ा और जब हमला हो रहा था, तब सुरक्षा में तैनात जवानों ने क्या किया?
इन सवालों के जवाब जांच पूरी होने के बाद ही साफ होंगे।

