

अंबाला से इस वक्त की सबसे बड़ी तस्वीर सामने आ रही है, जहां पुलिस और सिख संगत के बीच टकराव के बाद हालात तनावपूर्ण हो गए हैं।
दरअसल, गुरुवार को गुस्साई भीड़ ने जीटी रोड यानी NH-44 को जाम कर दिया। भीड़ को रोकने के लिए पुलिस ने सड़क पर बैरिकेडिंग की थी, लेकिन प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड तोड़ दिए और हाईवे तक पहुंच गए।
इसके बाद हालात उस वक्त और बिगड़ गए, जब भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े। देखते ही देखते मौके पर भगदड़ जैसी स्थिति बन गई और कई वाहन भी आपस में टकराकर क्षतिग्रस्त हो गए।
लेकिन कहानी सिर्फ यहां तक नहीं रुकती…
भीड़ ने जग्गी सिटी सेंटर के पास हाईवे पर जाम लगा दिया, जिसके चलते करीब 5 हाईवे पर यातायात प्रभावित हुआ। तनावपूर्ण माहौल को देखते हुए एनसीसी स्कूल प्रबंधन ने भी बच्चों की छुट्टी रोकने का फैसला लिया।
अब सवाल ये है कि आखिर विवाद शुरू कहां से हुआ?
बताया जा रहा है कि पूरा मामला 7 अगस्त को पंजोखरा साहिब गुरुद्वारे के सामने हुई एक घटना से जुड़ा है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पंजाब के हिंदू नेता गुरसिमरन सिंह मंड अपनी सुरक्षा के साथ गुरुद्वारा साहिब पहुंचे थे। आरोप है कि उनकी गाड़ी से संगत को टक्कर लगी।
इसके बाद गुस्साई भीड़ ने मंड का पीछा किया और उनकी इनोवा गाड़ी में तोड़फोड़ की।
वहीं, सिख जत्थेबंदियों का आरोप है कि इस मामले में पुलिस ने मंड की शिकायत पर तुरंत FIR दर्ज कर ली, लेकिन संगत की शिकायत पर कार्रवाई नहीं की गई। इसी कार्रवाई की मांग को लेकर गुरुवार को गुरुद्वारा साहिब में बैठक बुलाई गई थी, जो देखते ही देखते विरोध प्रदर्शन और फिर हाईवे जाम में बदल गई।
फिलहाल पंजोखरा साहिब से लेकर NH-44 तक तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है और प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती है—स्थिति को शांत करना और सड़क पर यातायात सामान्य कराना।
यानी एक शिकायत से शुरू हुआ विवाद अब पुलिस, प्रदर्शन और हाईवे जाम तक पहुंच चुका है… लेकिन असली सवाल यही है—आखिर दोनों पक्षों के आरोपों की सच्चाई जांच में क्या सामने आएगी?

