सोने की कीमतों में लगातार हो रही भारी गिरावट – देखे नया रेट

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सोने की कीमतों में उछाल के बाद भारी गिरावट देखने को मिली। यह गिरावट 76 रूपये गिरावट के साथ खुली। कोरोना काल की वैक्सीन बनने की घोषणा के बाद यह गिरावट निरंतर लगी हुई है। जिसका सीधा-सीधा असर सोने और चांदी के घटते मूल्यों पर पड़ा। सोने के इस उतार-चढ़ाव से व्यापारियों की ही नहीं बल्कि आम जनता की भी सांसे उपर-नीचे हो रही है। शुक्रवार को सोने की कीमत 52,227 से लुढ़क कर 52,151 रूपये पर आ गई है, जिसका आम कारोबार पर कोई फर्क नहीं पड़ा। बाजार खुलते ही कारोबार से सोने ने उच्चतम स्तर और निम्नतर स्तर को चंद मिनटों में छु लिया।

आर्थिक मंदी व अमेरिकी-चीन की टकराव के बाद डॉलर में कमजोरी से सोने व चांदी के भावों को आगे से सपोर्ट मिलने के आसार है। विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना काल में भी ग्राहकों का मंहगी धातुओं के प्रति निवेश कम नहीं हुआ है। यही वजह है कि अंतर्राष्ट्रीय बाजार में सोने का भाव 2089 डॉलर प्रति औंस से 215 डॉलर प्रति औंस घटकर 1874 ही रह गया है। शेयर बाजारों में अभी भी अनिश्चितता बनी हुई है जिसका मुख्य कारण कोरोना है। सोने का भाव इसे पहले अंतर्राष्ट्रीय मार्केट में 2011 में 1,911.60 डॉलर प्रति औंस तक था।

आपको बता दें कि सोना गहरे संकट में काम आने वाली धातु है, जोकि कोविड-19 महामारी और भू-राजनीतिक संकट गहराते हुए भी सोना एक नया रिकॉर्ड बना रहा है। अन्य निवेशकों की तुलना में सोना आज भी निवेशकों की पहली पसंद बना हुआ है। विश्लेषकों का मानना है कि सोने का इस तरह का उतार-चढ़ाव अभी कम से कम एक से डेढ़ साल तक चलता रहेगा। दिल्ली बुलियन एंड ज्वेलर्स वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष विमल गोयल का मानना है कि संकट के समय में सोने पर निवेश ‘सोने पर सुहागे‘ का काम करेगा। वहीं जेपी मॉर्गन का कहना है कि वर्तमान में सोना 70 हजार रूपये प्रति 10 ग्राम के स्तर को दीपावली तक पूरा कर लेगा। अगर कोरोना वैक्सीन का निर्माण हो जाता है तो यह स्तर घट भी सकता है।

गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड यानि ईटीएफ में निवेश जुलाई के महीने में 921 करोड़ के पार पहुंच गया है। कीमतों मेंं इजाफा होने पर निवेश्कों में काफी उत्साह देखने को मिल रहा है, जिससे वे गोल्ड ईटीएफ में निवेश कर रहे हैं। आंकड़े बताते हैं कि जून के महीने में निवेश्कों ने गोल्ड ईटीएफ में 494 करोड़ रूपये डाले थे। जिसके बाद धीरे-धीरे जुलाई के अंत तक यह 19 प्रतिशत बढ़कर 12,941 करोड़ रूपये पर पहुंच गईं, जो कि जून माह के अंत तक 10,857 करोड़ रूपये दर्ज की गई थी। इसी तरह चालू वित्त वर्ष के पहले चार महिनों में चांदी का आयात भी 68.53 करोड़ डॉलर यानि 5,185 करोड़ रूपये रह गया।

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