गर्मियों में गौवंश की बुरी हालत – जून में 246 ने तोड़ा दम

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हमारे भारत मे पशुपालन का विशेष महत्व है. खास तौर पर दूधारू पशुओं को पाल कर डेयरियां चलाई जाती है. देखा जाए तो पशु रोज़गार में अहम स्थान रखते हैं. लेकिन कुमासपुर गांव में संचालित नंदीशाला इन दिनों पशुओं के लिए मृत्यु का द्वार बन कर सामने आई है. दरअसल, यहां के नंदीशाला में पशु सुरक्षित नही हैं. खबरों के अनुसार यहां ना तो धूप से बचने के लिए छत्त का इंतज़ाम है और ना ही यहां पशओं के चारे के इंतेज़ाम किया गया है. गर्मी और भूख से बिलखते पशु यहां दम तोड़ रहे हैं.

बता दें की गांव की 14 एकड़ जमीन पर इस नंदीशाला का निर्माण करवाया गया था जिसके कारण हर किसी ने नगर निगम की तारीफ भी की थी. लेकिन अब हालात बद से बदतर हो चुके हैं. अधिकारयों की लगातार लापरवाहियों के चलते आए दिन बेजुबान जानवर यहां मरने की कगार पर पहुंच रहे हैं.

इसके बाद नंदीशाला को चलाने का जिम्मा ठेकेदारों ने उठाया तह लेकिन अब नगर निगम की ओर से किसी तरह की कोई मदद ना मिलने के कारण पशुओं का यहां जीना दुश्वार होता चला जा रहा है. कुछ महीनों पहले नगर निगम ने एक निजी एजेंसी को पशुओं को चारा काट कर खिलाने के ज़िम्मा दिया था. लेकिन लॉकडाउन के चलते जब एजेंसी तीन महीने का बिल लेकर नगर निगम पहुंची तो उन्होंने उस बिल का भुगतान करने से साफ इंकार कर दिया.

इसके बाद नंदीशाला के पशुओं को साबुत चारा डाल कर खिलाया जाता रहा. जिसके चलते वहां के पशु जल्द ही बीमार हो कर मृत्यु के निकट पहुंच रहे हैं. बता दें कि अब तक यहां जून महीने में ही 246 से अधिक पशु अपनी जान गंवा चुके हैं. ऐसे में अगर प्रशासन इसका जिम्मा नही उठाता तो और बेजुबानों की जान जा सकती है.

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