किसान की बेटी बनी वर्ल्ड क्लास बॉक्सर – जानिए स्वीटी बूरा की पूरी कहानी

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कहते हैं जब मन में कुछ कर दिखाने की ठान ली जाए तो भगवान भी हमारी मदद करने में जुट जाता है. जहाँ एक तरफ देश में आज भी बेटों को बेटियों से उचित समझा जाता है, वहीँ बेटियां आए दिन देश का गर्व बढ़ाती हुई नज़र आ रही हैं. आज हम आपको एक ऐसी ही बेटी की कहानी बता रहे हैं, जो आज केवल भारत ही नहीं बल्कि अंतर्राष्ट्रीय लेवल तक अपनी छाप छोड़ चुकी हैं.

इनका नाम है स्वीटी बूरा. स्वीटी एक छोटे से गाँव घिराए से ताल्लुक रखती हैं. आईये जानते हैं इनकी स्ट्रगल की कहानी के बारे में. पिता ने दिया भरपूर साथ. मिली जानकारी के अनुसार स्वीटी बूरा के पिता पेशे से एक मामूली किसान हैं. पिता महेंद्र सिंह की आर्थिक स्तिथि काफी कमजोर रही थी लेकिन उनकी बेटी का बचपन से ही बॉक्सर बनने का सपना था. हालाँकि इस सपने के बीच गांववाले और रिश्तेदार कईं बार अड़चने पैदा करते रहे थे लेकिन महेंद्र सिंह एकमात्र ऐसे शख्स थे जिन्होंने अपनी बच्ची का साथ दिया और सबके ताने सहते हुए भी बेटी के सपने को पूरा करने की सोची.

उन्होंने स्वीटी को हिसार में बॉक्सिंग प्रैक्टिस के लिए भिजवा दिया और आख़िरकार तीन महीने की मेहनत साल 2009 में उस समय रंग लायी जब स्वीटी बूरा ने स्टेट लेवल पर गोल्ड मेडल जीत कर महेंद्र सिंह का अभिमान बढ़ा दिया.

रोज 12 कि. मी. चलाती थी साइकिल

एक इंटरव्यू में स्वीटी ने बताया कि उनके बॉक्सर बनने के सफर में उनके पिता महेंद्र सिंह के इलावा उनके कोच हेमलता सिंह बगड़वाल, राज सिंह और अनूप कुमार ने उनकी हिम्मत हमेशा बढाई. स्वीटी के अनुसार जीत के शिखर तक पहुँचने के लिए उन्हें कड़ी मेहनत करनी पड़ी थी. वह हर रोज़ 12 किलोमीटर तक साइकिल चलाया करती थीं. इतना ही नहीं महज़ 15 साल की उम्र में ही उन्होंने कबड्डी खेलना भी शुरू कर दिया था. साल 2009 में बॉक्सिंग ट्रायल में उन्होंने सोनिया अपोनेंट से काफी मार भी खाई थी. लेकिन अब वह लगातार 5 बार आल इंडिया लेवल में जीत कर अपनी अलग पहचान स्थापित कर चुकी हैं और फ़िलहाल साई सेंटर में प्रैक्टिस कर रही हैं.

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