जब IAS अफसर के साथ ऐसा हो रहा हैं – तो आम आदमी के साथ क्या होता होगा ?

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IAS रानी नागर हरियाणा की 2014 बैच की IAS अधिकारी हैं. रानी नागर मूल रूप से उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद की रहने वाली हैं. पिछले दिनों रानी नागर ने फ़ेसबुक पर एक वीडियो जारी करते हुए कहा था की उनकी व उनकी बहन की जान को खतरा हैं.

रानी नागर ने फेसबुक पर लिखा था की मैं दिसंबर, 2019 से बहन के साथ चंडीगढ़ के सेक्टर-6 स्थित यूटी गेस्ट हाउस के कमरा नंबर 311 में किराए पर रह रही हूं. मेरी जान को खतरा है. अभी चंडीगढ़ में कर्फ्यू लगा हुआ है. इस कारण से मैं और मेरी बहन रीमा नागर चंडीगढ़ से बाहर नहीं निकल सकते. चंडीगढ़ से आगे गाजियाबाद तक के रास्ते भी बन्द हैं. लॉकडाउन और कर्फ्यू खुलने के बाद मैं अपने कार्यालय में इस्तीफा देकर गाजियाबाद चली जाऊंगी. मैंने चंडीगढ़ पुलिस के विरुद्ध एक मामला दर्ज करवा रखा है. यदि मुझे कुछ हो जाता है, तो यह वीडियो मेरे केस में फाइल कर दिया जाए.

खाने में मिली थी स्टैपलर की पिन

रानी नागर ने अपने फ़ेसबुक पर एक पोस्ट में लिखा की उन्हें UT गेस्ट हाउस में खाने में स्टैपलर की पिन दी गयी थी. रानी नागर ने लिखा की मेरे पास अभी अपनी रोटी खाने के लिए भी बहुत सीमित साधन है। मेरी आप सभी से हाथ जोड़कर विनती है कि जितनी जल्दी मेरा इस्तीफ़ा स्वीकार होगा उतनी ही जल्दी मेरा तनख़्वाह में से कटा हुआ एन पी एस फ़ण्ड मुझे प्राप्त होगा जिससे मैं अपना रोटी का ख़र्चा चला पाऊँगी। मेरे इस्तीफ़ा स्वीकार ना होने से मेरा और अधिक शोषण होगा। आगे सरकारी नौकरी कर पाना मेरे लिए सम्भव नहीं होगा। यू टी गेस्ट हाऊस के कमरे में स्वयं खाना बनाने के लिए गैस व चूल्हा लगाया जाना मना था। मैं रूपये देकर यू टी गेस्ट हाऊस से जो खाना ख़रीदती थी मुझे उस खाने में लोहे के पिन डालकर खाना दिया जाता था। इस बारे की गयी लिखित शिकायत की प्रति संलग्न है। लाक्डाउन व कर्फ़्यू में यू टी गेस्ट हाऊस को जनता के लिए बंद कर दिया गया लेकिन मुझे और मेरी बहिन रीमा नागर को यू टी गेस्ट हाऊस में ही रखा गया। कर्फ़्यू व लाक्डाउन में हमें खाना भी नहीं मिला। मैं और मेरी बहिन रीमा नागर ने कर्फ़्यू व लाक्डाउन में बड़ी मुश्किल से तरल पदार्थ आदि से अपना गुज़ारा चलाया। यदि आप मेरा इस्तीफ़ा रोकने बारे आग्रह व आंदोलन ना करें तो आप सभी की हम पर बड़ी दया होगी

तोड़ा गया था दरवाजा

रानी नागर ने एक खुलासा करते हुए कहा की UT गेस्ट हाऊस के जिस कमरा नम्बर 311 में मुझे रानी नागर को रखा गया था उसका दरवाज़ा भी तोड़ दिया गया था। यू टी गेस्ट हाऊस के मेरे कमरा नम्बर 311 के टूटे हुए दरवाज़े की तस्वीरें व इस सम्बन्ध में की गयी लिखित शिकायत की प्रति संलग्न है। कमरा नम्बर 311 के टूटे हुए दरवाज़े में से बाहर से अन्दर झाँक कर देखना व किसी भी प्रकार का वीडियोग्राफ़ी किया जाना सरल व सम्भव था।दिनांक 04 मई 2020 प्रात:काल हमारे चंडीगढ से निकलते समय तक यू टी गेस्ट हाऊस के मेरे कमरा नम्बर 311 का दरवाज़ा ठीक नहीं करवाया गया था। इसके अतिरिक्त मैं रानी नागर आप सभी को सूचित करना चाहती हूँ कि यू टी गेस्ट हाऊस के मेरे कमरा नम्बर 311 का दरवाजा कर्फ़्यू में किसी ने बाहर से चाबी लगा कर खोल लिया था और उस समय मैं रानी नागर व मेरी बहिन रीमा नागर यू टी गेस्ट हाऊस के मेरे कमरा नम्बर 311 के अन्दर ही थे। मेरे कमरा नम्बर 311 के दरवाज़े में लगी एक हल्की सी चटकनी की रोक से दरवाजा पूरा खुलने से पहले ही मैं रानी नागर व मेरी बहिन रीमा नागर ने घरेलू समान के बैग दरवाज़े के अन्दर की तरफ़ लगा कर मेरे कमरा नम्बर 311 का दरवाजा खुलने से रोका। यू टी गेस्ट हाऊस के मेरे कमरा नम्बर 311 के दरवाज़े में लगी दूसरी चटकनी ख़राब रहती थी व अन्दर से बन्द नहीं होती थी।इसके बाद से चंडीगढ में कर्फ़्यू में मैं रानी नागर व मेरी बहिन रीमा नागर घरेलू समान के बैग दरवाज़े के अन्दर की तरफ़ लगा कर रखते थे जिससे दोबारा कोई हमारे कमरा नम्बर 311 का दरवाजा ना खोल पाए। इसके बाद से कर्फ़्यू में मैं रानी नागर व मेरी बहिन रीमा नागर ने बारी बारी जागे रह कर अपनी सुरक्षा करी जिससे दोबारा कोई हमारे कमरा नम्बर 311 का दरवाजा खोलकर हमारे सोते समय अन्दर ना आ जाये। मैं रानी नागर पुत्री श्री रतन सिंह नागर सभी से हाथ जोड़कर सादर यह विनती करती हूँ कि आप मेरा इस्तीफ़ा स्वीकार ना किए जाने के लिए आग्रह व आंदोलन ना करें। मेरे इस्तीफ़ा स्वीकार ना होने से मेरा और अधिक शोषण होगा।आगे सरकारी नौकरी कर पाना मेरे लिए सम्भव नहीं होगा।यदि अधिक समय तक मेरा इस्तीफ़ा स्वीकार ना हुआ और मेरा एन पी एस का फ़ण्ड मुझे ना मिला तो जल्दी ही मेरे भूखे मरने की नौबत आ जाएगी। यदि आप मेरा इस्तीफ़ा रोकने बारे आग्रह व आंदोलन ना करें तो आप सभी की हम पर बड़ी दया होगी।

घर पर भी हो रही हैं अजीब घटनाएँ

12 मई को रानी नागर ने गजियाबाद स्थित निवास स्थान पर भी घर के मेन गेट को तोड़ने की कोशिश की गयी हैं. रानी नागर ने बताया की दिनांक 12 मई 2020 को लगभग दोपहर 02.50 बजे एक नक़ाबपोश व्यक्ति हैलमेट व काला चश्मा लगा कर हमारे ग़ाज़ियाबाद स्थित आवास पर आया और उसने हमारे घर के गेट में बार बार लातें मारीं। वह व्यक्ति स्टील ग्रे रंग की स्कूटी पर आया था। हुलिये से वह महिला प्रतीत हो रहा था। मैंने उस व्यक्ति से पूछा की आप किस कारण से आए हो। वह व्यक्ति बार बार हमारे गेट में लात मारता रहा और मुझसे कहता रहा कि तुम गेट से बाहर निकल कर सड़क पर आओ मुझे तुमसे बात करनी है। मैंने उस व्यक्ति से यह भी पूछा कि वह अपना नाम, मोबाइल नम्बर, स्कूटी का नम्बर लिखकर मुझे लिखित नोटिस दे कि उसके पास मुझसे बात करने का क्या अधिकार है। मैंने उस व्यक्ति से यह भी कहा कि यदि उस व्यक्ति के पास कोई लिखित नोटिस है तो उसकी प्रति हमारे गेट पर लगा दे।मैंने उस व्यक्ति से यह भी कहा कि यदि उस व्यक्ति के पास कोई लिखित नोटिस है तो मैं उसका जवाब ई-मेल के माध्यम से भेज दूँगी। उस व्यक्ति ने मुझे कोई नोटिस की प्रति नहीं दी।उस व्यक्ति ने मुझे अपना नाम, मोबाइल नम्बर, स्कूटी का नम्बर भी लिखकर नहीं दिया। इसके बाद वह व्यक्ति अपनी स्कूटी चलाकर हमारे गेट से चला गया। मेरे पास सारे प्रकरण की वीडियोग्राफ़ी है। उस व्यक्ति की दो फ़ोटो साथ संलग्न हैं। मेरी आप सभी से विनम्र प्रार्थना है कि हमारा गेट ज़्यादा लातें व डंडे मारने से जल्दी ही टूट सकता है। मैं अपनी रोटी का ख़र्चा भी बड़ी मुश्किल से चला रही हूँ। मेरे पास इतना साधन नहीं है कि मैं टूटे हुए गेट की मरम्मत करवा सकूँ। यदि हमारा गेट लोगों द्वारा इस तरह तोड़ दिया गया तो हमें खुले गेट से रहना पड़ेगा। टूटे हुए एवं खुले गेट से रहने पर दो महिलाओं के प्राणों व अस्मिता की रक्षा सम्भव नहीं होगी।

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