भारत मलेरिया की दवाई नहीं देगा तो जवाबी कार्रवाई हो सकती हैं ?

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संसार क्रान्ति: भारत के PM नरेंद्र मोदी के अच्छे दोस्त यानी डॉनल्ड ट्रम्प ने कहा की अगर भारत अमेरिका को मलेरिया की दवाई हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन (Hydroxychloroquine) नहीं देता हैं तो अमेरिका जवाबी कार्रवाई करेगा.

इस समय भारत में बड़ी और छोटी टोटल 9 कम्पनियाँ इसके निर्माण का कार्य कर रही हैं. और अमेरिका में केवल 2 कम्पनियाँ की इस दवाई का निर्माण कर रही हैं. कई देशों में कोरोना संक्रमित लोगों को यह दवाई दी गयी हैं. जिसके बाद संक्रमित लोगों में कोरोना के लक्षण कम हुए हैं.

BBC की एक रिपोर्ट के अनुसार फ़्रांस के एक डॉक्टर Didier Raoult ने 80 लोगों को यह दवाई देनी शुरू की. इस दवाई के साथ-साथ कोरोना संक्रमित मरीजों को Azithromycin नामक दवाई भी दी गयी. Azithromycin एक ऐंटीबायआटिक दवा हैं. Dr Didier Raoult के मुताबिक जिन 80 मरीजों को यह दवा दी गयी हैं उन्मे से 78 लोगों पर इसका असर हैं.

अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर के मशहूर डॉक्टर ने Hydroxychloroquin और Azithromycin दवा का मिश्रण 400-500 लोगों पर टेस्ट किया. ये 400-500 लोग कोरोना संक्रमित लोग थे जिनकी रिपोर्ट पॉज़िटिव आयी थी. इन दवाइयों के उपयोग से मरीजों की तबियत में सुधार हुआ और कोरोना के लक्षण कम हुए.

भारत कई सालों से मलेरिया जैसी बीमारी से ग्रस्त रहा हैं तो भारत में हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन दवा उत्पाद और देशों से ज़्यादा होता हैं. इस दवाई को बनाने के लिए जो कच्चा माल (Raw Material) भारत में ही सबसे ज़्यादातर उपलब्ध हैं. कई वर्षों से लगातार निर्माण होने के कारण हमारे देश में इसकी कीमतें ओर देशों से काफी कम हैं और हमारी क्वालिटी बेहतर हैं. भारत में कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए इस दवा की ज़रूरत भारत में सबसे ज़्यादा समझी जा रही हैं.

25 मार्च को भारत के विदेश व्यापार (Foreign Trade) विभाग ने हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन दवा के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया था. Foreign Trade विभाग का कहना था की इसका निर्यात केवल विशेष परिस्थितियों में ही किया जाएगा. उनके बाद 4 अप्रैल को Foreign Trade ने अपने ऑर्डर में ओर बदलाव किया और इस दवा के निर्यात पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया.

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