कोरोना के इलाज में भारत साबित होगा ‘गेम चेंजर’

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संसार क्रान्ति (नवीन नरवाना): कोरोना वायरस आजकल यह नाम बच्चे से लेकर बुजुर्ग सबकी ज़ुबान है. कोरोना की अभी तक कोई सटीक वैक्सीन तैयार नहीं कि गयी हैं. चाईना ने दावा किया था की उसने वैक्सीन बना ली हैं मगर उसपर भी फिलहाल टेस्ट चल रहें हैं.

मलेरिया की एक दवाई की पूरी सप्लाई का 70 फीसदी हिस्सा भारत देश में ही बनता है. हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन (Hydroxychloroquine) दवाई की डिमांड हर कोरोना संक्रमित देश में हैं. अमेरिका भी लगातार इस दवाई की माँग कर रहा हैं क्योंकि यह कोरोना को रोकने में सक्षम हो सकती हैं. कल भारत ने इस दवाई के निर्यात पर लगा हुआ बैन हटा दिया हैं. आपको बता दें की भारत 30 दिन में 40 टन (यानी 20MG की 20 करोड़) टैब्लेट बनाने की क्षमता रखता हैं.

फ़्रांस के एक डॉक्टर Didier Raoult ने इस दवाई के साथ एक ऐंटीबायआटिक दवा को मिलाकर 80 कोरोना संक्रमित मरीजों को दिया, जिनमे से 78 मरीज अब ठीक हैं. 2 मरीजों पर इसका असर नहीं हुआ, ऐसे में अगर यह दवाई 80 में से 78 लोगों पर असर दिखाती हैं तो कोरोना पर एक विजय साबित हो सकती हैं. इससे दवाई से मरने वालों की संख्या में काफी गिरावट आ सकती हैं.

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