हरियाणा के छोरे ने लड़ी थी तिरंगे की सबसे बड़ी लड़ाई

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संसार क्रान्ति: तिरंगा हमारे भारत की आन-बान-शान सब कुछ हैं. अगर आपको कोई ये कहे को आप तिरंगा अपने साथ नहीं रख सकते या आप अपने देश या अपने घर तिरंगा नहीं लहरा सकते. शायद की कोई ऐसा भारतीय होगा जो यह सुनकर निराश ना हो.

नवीन जिंदल नें लड़ी थी तिरंगे की लड़ाई

नवीन जिंदल ने हमारे राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे के लिए वो किया जो शायद ही कोई नेता कर पाता। जिंदल की तिरंगा कहानी बड़ी दिलचस्प हैं। बात जिंदल के कॉलेज टाईम की हैं जब नवीन जिंदल अपनी पढ़ाई पूरी करने अमेरिका के टेक्सास यूनिवर्सिटी में गये थे. सन 1992 में जिंदल भारत वापस लौटे और जिंदल ने वापस आते ही अपने कारखानों पर राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा फहराना शुरू कर दिया. जिला प्रशासन ने उन्हें ऐसा ना करने को कहा तथा चेतावनी भी दी।

प्रशासन की चेतावनी नवीन जिंदल के दिल में अखर गई. अपने ही देश में अपना झंडा ना फहराने वाली बात लेकर जिंदल नें हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. सात सालों के बाद देश की सबसे बड़ी अदालत ने नवीन जिंदल के हक में फैंसला सुनाया. सुप्रीम कोर्ट ने कहा की देश के प्रत्येक व्यक्ति की पूरे सम्मान और आदर के साथ देश का राष्ट्रीय ध्वज फहराने का अधिकार है.

आपको बता दें की सुप्रीम कोर्ट के आदेश अनुसार 26 जनवरी 2002 से भारत सरकार फ़्लैग कोड में संशोधन करके भारत के सभी नागरिकों को किसी भी दिन राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे को फहराने का अधिकार दिया हैं. सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा हैं की राष्ट्रीय ध्वज को फहराते समय इसकी गरिमा बरकरार रहें और किसी भी स्थिति में इसका अपमान ना होने पाए.

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