उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद की वसुंधरा पुलिस चौकी में हुए जोरदार धमाके ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना के बाद जांच एजेंसियां हर पहलू की पड़ताल कर रही हैं, लेकिन अब तक यह साफ नहीं हो पाया है कि चौकी के अंदर विस्फोट किस चीज से हुआ था। सबसे बड़ी परेशानी यह है कि घटनास्थल के आसपास CCTV कैमरे भी मौजूद नहीं हैं। ऐसे में जांच की दिशा अब फोरेंसिक रिपोर्ट पर टिकी है। आगे पढ़ें पूरी खबर।

धमाके से टूटे शीशे, दीवार में आई दरार
यह घटना शुक्रवार रात करीब 9 बजे इंदिरापुरम थाना क्षेत्र की वसुंधरा पुलिस चौकी में हुई। धमाका इतना तेज था कि चौकी के दो शीशे टूट गए और एक दीवार में हल्की दरार आ गई। घटना के समय चौकी में एक सब-इंस्पेक्टर और सामान पहुंचाने आया एक डिलीवरी एजेंट मौजूद था। टूटे कांच के टुकड़े लगने से डिलीवरी एजेंट घायल हो गया, जिसे उपचार के लिए भेजा गया।
CCTV कैमरों की कमी से जांच में चुनौती
जांच के दौरान सामने आया है कि चौकी के आसपास ऐसा कोई CCTV कैमरा नहीं है, जिससे धमाके के समय की गतिविधियों का पता लगाया जा सके। चौकी के मुख्य गेट पर लगे कैमरे में घटना से जुड़ा कुछ रिकॉर्ड हुआ है या नहीं, इसकी भी जांच की जा रही है। पुलिस के सामने अब यह पता लगाने की चुनौती है कि विस्फोटक या संदिग्ध वस्तु चौकी के अंदर कैसे पहुंची।
बम निरोधक दस्ते को भी नहीं मिला स्पष्ट जवाब
घटना की सूचना मिलते ही बम निरोधक दस्ता और फोरेंसिक टीम मौके पर पहुंची। शुरुआती जांच में यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि धमाका किस तरह का था और इसमें किस सामग्री का इस्तेमाल हुआ। घटनास्थल से जुटाए गए नमूनों को विस्तृत जांच के लिए आगरा भेजा गया है। रिपोर्ट आने के बाद ही विस्फोट की प्रकृति और संभावित कारणों को लेकर स्थिति साफ हो सकेगी।
ATS समेत कई एजेंसियां जांच में जुटीं
मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश ATS समेत पुलिस और खुफिया एजेंसियां भी जांच कर रही हैं। टीमें यह पता लगाने में जुटी हैं कि धमाका किसी दुर्घटना का नतीजा था या इसके पीछे कोई साजिश हो सकती है। फिलहाल किसी एक वजह को आधिकारिक रूप से जिम्मेदार नहीं ठहराया गया है।
हर एंगल से जुटाए जा रहे सबूत
वसुंधरा पुलिस चौकी के आसपास का इलाका व्यस्त माना जाता है। यहां से इंदिरापुरम और गाजियाबाद के बीच लगातार आवाजाही रहती है। ऐसे संवेदनशील स्थान पर पुलिस चौकी के भीतर धमाका होने से सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। अब जांच एजेंसियों की नजर फोरेंसिक रिपोर्ट, CCTV फुटेज और घटनास्थल से मिले साक्ष्यों पर है।






