नेपाल में अचानक आई बाढ़ ने ऐसा रौद्र रूप दिखाया कि चीन सीमा से लेकर भारत तक चिंता बढ़ गई है। भोटेकोशी नदी में अचानक आए सैलाब ने कई इलाकों को तबाह कर दिया। आगे पढ़ें पूरी खबर…

नेपाल के उत्तरी रसुवा जिले में बुधवार सुबह करीब 9 बजे भोटेकोशी नदी अचानक उफान पर आ गई। चीन के तिब्बत क्षेत्र की तरफ से आए इस सैलाब ने सीमा के पास बसे तिमुरे और स्याफ्रुबेसी इलाकों में भारी तबाही मचा दी। गांव, बाजार, सड़कें और पुल बाढ़ की चपेट में आ गए।
सबसे ज्यादा असर चीन-नेपाल सीमा के नजदीकी इलाकों में देखने को मिला है। तिमुरे में दुकानें, वाहन, सामान और सीमा से जुड़ी सुविधाएं पानी में बह गईं। स्याफ्रुबेसी समेत आसपास की कई बस्तियों में भी भारी नुकसान की खबर है।
इस आपदा ने नेपाल के सुरक्षा तंत्र को भी प्रभावित किया है। तिमुरे में तैनात सशस्त्र पुलिस बल के 9 जवानों के संपर्क से बाहर होने की जानकारी सामने आई है। वहीं, सेना ने हेलिकॉप्टर के जरिए 12 लोगों को सुरक्षित निकाला है और सात घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया है। राहत-बचाव के लिए सेना और निजी क्षेत्र के कुल 12 हेलिकॉप्टर लगाए गए हैं।
बारिश कम, फिर इतनी बड़ी बाढ़ कैसे आई?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब रसुवा में पिछले 24 घंटे में भारी बारिश नहीं हुई, तो अचानक नदी में इतना पानी कहां से आया। मौसम विभाग के मुताबिक इलाके में करीब 7 मिलीमीटर से ज्यादा बारिश नहीं हुई थी। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि तिब्बत क्षेत्र में किसी ग्लेशियल झील के अचानक फटने यानी GLOF की वजह से भोटेकोशी में सैलाब आया हो।
विशेषज्ञों के मुताबिक हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियरों के तेजी से पिघलने के कारण ग्लेशियल झीलें बन रही हैं। इनके अचानक टूटने पर नीचे की घाटियों में बेहद तेज और विनाशकारी बाढ़ आ सकती है।
अब भारत तक पहुंच सकता है बाढ़ का असर
भोटेकोशी नदी आगे चलकर त्रिशूली नदी में मिलती है और यही नदी आगे भारत में गंडक के नाम से जानी जाती है। इसी वजह से नेपाल के नुवाकोट, धादिंग, गोरखा और चितवन जैसे इलाकों में नदी किनारे रहने वाले लोगों के लिए हाई अलर्ट जारी किया गया है। पानी के मुगलिन तक पहुंचने की आशंका भी जताई गई है।
नुवाकोट में त्रिशूली बाजार के पास करीब 60 घर बहने की खबर है। दो कंक्रीट पुल भी बाढ़ में बह गए हैं। इसके अलावा त्रिशूली और देवीघाट हाइड्रोपावर परियोजनाओं को नुकसान पहुंचा है।
खतरा अभी टला नहीं, दोबारा आ सकती है बाढ़
सबसे ज्यादा चिंता इस बात को लेकर है कि बाढ़ का खतरा अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। अधिकारियों के मुताबिक चीन की ओर से मिली जानकारी में फटी हुई ग्लेशियल झील के क्षेत्र में करीब 7 मीटर ऊंचा पानी रोकने वाला बांधनुमा हिस्सा मौजूद होने की बात सामने आई है। इसके दोबारा टूटने पर नदी में फिर तेज सैलाब आ सकता है।
नेपाल में सेना, पुलिस और स्थानीय प्रशासन राहत एवं बचाव अभियान में जुटे हैं। कई इलाकों में पहुंचना मुश्किल होने के कारण नुकसान और हताहतों का अंतिम आंकड़ा अभी सामने नहीं आया है। वहीं, नेपाल-चीन व्यापार मार्ग और रसुवागढ़ी कस्टम क्षेत्र भी प्रभावित हुआ है।




