अब देश में जमीन और प्लॉट की पहचान भी आधार कार्ड की तरह एक यूनिक नंबर से होगी। केंद्र सरकार ने डिजिटल इंडिया लैंड रिकॉर्ड्स मॉडर्नाइजेशन प्रोग्राम (DILRMP 3.0) के तहत ‘भू-आधार’ (ULPIN) लागू करने की शुरुआत कर दी है। इसके तहत हर जमीन और प्लॉट को 14 अंकों का एक यूनिक आईडी नंबर मिलेगा, जिससे जमीन की खरीद-बिक्री, रजिस्ट्री और रिकॉर्ड से जुड़े काम पहले से ज्यादा आसान और पारदर्शी होंगे। आगे पढ़ें पूरी खबर…

क्या है भू-आधार?
भू-आधार यानी Unique Land Parcel Identification Number (ULPIN) एक 14 अंकों का यूनिक नंबर है, जो हर जमीन के टुकड़े को उसकी भौगोलिक लोकेशन (Latitude-Longitude) के आधार पर दिया जाएगा। यह नंबर उस जमीन की स्थायी डिजिटल पहचान बनेगा।
क्या बदलेगा जमीन की रजिस्ट्री में?
नई व्यवस्था लागू होने के बाद:
- हर प्लॉट की अलग डिजिटल पहचान होगी।
- रजिस्ट्री और भूमि रिकॉर्ड एक-दूसरे से लिंक होंगे।
- नक्शा, मालिकाना हक और जमीन का रिकॉर्ड ऑनलाइन उपलब्ध होगा।
- फर्जी दस्तावेज और एक ही जमीन की दोहरी बिक्री पर रोक लगाने में मदद मिलेगी।
लोगों को क्या होगा फायदा?
- भू-आधार लागू होने से जमीन मालिकों को कई बड़े फायदे मिलेंगे।
- जमीन की असली जानकारी तुरंत ऑनलाइन मिल सकेगी।
- खरीद-बिक्री के समय रिकॉर्ड की जांच आसान होगी।
- बैंक लोन और सरकारी योजनाओं में जमीन का सत्यापन तेज होगा।
- भूमि विवाद कम करने में मदद मिलेगी।
पूरे देश में लागू होगी नई व्यवस्था
सरकार ने DILRMP 3.0 को 2026 से 2031 तक लागू करने की योजना बनाई है। इस योजना के तहत राज्यों में जमीन के रिकॉर्ड, नक्शे और रजिस्ट्रेशन सिस्टम को एक डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ा जाएगा।
क्या आपको कुछ करना होगा?
ज्यादातर मामलों में भू-आधार राज्य सरकारों के भूमि रिकॉर्ड के डिजिटाइजेशन और सर्वे के आधार पर जारी किया जाएगा। जमीन मालिकों को अपने राज्य के भूमि रिकॉर्ड पोर्टल पर जाकर भविष्य में अपने प्लॉट का ULPIN नंबर देखना और सत्यापित करना होगा।
निष्कर्ष
भू-आधार व्यवस्था लागू होने के बाद जमीन की पहचान पूरी तरह डिजिटल हो जाएगी। इससे रजिस्ट्री प्रक्रिया अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और तेज बनने की उम्मीद है, साथ ही जमीन से जुड़े विवाद और फर्जीवाड़े पर भी लगाम लगाने में मदद मिलेगी।




