लंबे समय से अटकी किशाऊ बहुउद्देशीय बांध परियोजना को लेकर मंगलवार को छह राज्यों के बीच महत्वपूर्ण समझौता हुआ। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान ने परियोजना के क्रियान्वयन के लिए समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते से किशाऊ परियोजना के आगे बढ़ने का रास्ता साफ हो गया है। आगे पढ़ें पूरी खबर…
छह राज्यों के बीच बनी सहमति
किशाऊ परियोजना को लेकर लंबे समय से राज्यों के बीच पानी और बिजली की हिस्सेदारी को लेकर मतभेद थे। अब सहमति बनने के बाद परियोजना को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया शुरू होगी। समझौते के बाद इसे केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी के लिए प्रस्तुत किया जाएगा।
परियोजना में हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान की भागीदारी है। यह बांध उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की सीमा से जुड़ी टौंस नदी पर प्रस्तावित है। इसका उद्देश्य जल भंडारण, पेयजल आपूर्ति और बिजली उत्पादन के साथ यमुना नदी के प्रवाह को मजबूत करना है।
केंद्र सरकार उठाएगी 90 फीसदी लागत
समझौते के तहत किशाऊ परियोजना के जल घटक की 90 फीसदी लागत केंद्र सरकार केंद्रीय सहायता के रूप में वहन करेगी। शेष 10 फीसदी वित्तीय भार छहों भागीदार राज्यों के बीच साझा किया जाएगा। इससे राज्यों पर पड़ने वाला आर्थिक दबाव कम होगा और परियोजना के क्रियान्वयन में तेजी आने की उम्मीद है।
हिमाचल के पानी को लेकर भी बनी सहमति
बैठक में हिमाचल प्रदेश के हिस्से के पानी को दिल्ली और राजस्थान को देने पर भी सहमति बनी। इसके बदले दिल्ली और राजस्थान हिमाचल प्रदेश के हिस्से के बिजली घटक की लागत साझा करेंगे। इस व्यवस्था से पानी और बिजली की हिस्सेदारी को लेकर लंबे समय से चले आ रहे मतभेदों का समाधान निकालने की कोशिश की गई है।
यमुना के प्रवाह को मिलेगा फायदा
किशाऊ परियोजना को यमुना नदी के पुनर्जीवन से भी जोड़कर देखा जा रहा है। परियोजना के पूरा होने से यमुना में स्वच्छ पानी का प्रवाह बढ़ने की उम्मीद है। केंद्र सरकार के अनुसार, यह कदम यमुना को अधिक स्वच्छ और पुनर्जीवित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
दिल्ली को अतिरिक्त पानी मिलने की उम्मीद
किशाऊ, लखवार और रेणुकाजी बांध परियोजनाओं को मिलाकर दिल्ली को अतिरिक्त जल उपलब्ध कराने की योजना है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इन तीनों परियोजनाओं से दिल्ली को कुल 863 एमजीडी अतिरिक्त पानी मिलने का अनुमान है। इसमें किशाऊ से 372 एमजीडी, रेणुकाजी से 275 एमजीडी और लखवार से 216 एमजीडी पानी शामिल है।
हालांकि, यह आंकड़ा तीनों परियोजनाओं के पूरा होने के बाद संभावित जल आवंटन से जुड़ा है। किशाऊ परियोजना के लिए मंगलवार को हुआ समझौता अब आगे की मंजूरी और क्रियान्वयन प्रक्रिया का आधार बनेगा।
दशकों से लंबित थी परियोजना
किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना लंबे समय से विभिन्न कारणों से अटकी हुई थी। पानी के बंटवारे, बिजली उत्पादन की लागत और राज्यों की वित्तीय जिम्मेदारियों को लेकर सहमति नहीं बन पा रही थी। अब केंद्र की पहल पर छह राज्यों के बीच समझौता होने से इस महत्वाकांक्षी परियोजना को नई गति मिलने की उम्मीद है
आगे क्या होगा?
समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर के बाद परियोजना को केंद्रीय मंत्रिमंडल के समक्ष मंजूरी के लिए रखा जाएगा। इसके बाद स्वीकृतियों, वित्तीय व्यवस्था और निर्माण से जुड़ी प्रक्रियाओं को आगे बढ़ाया जाएगा। परियोजना के जमीन पर उतरने से उत्तर भारत में जल प्रबंधन, पेयजल आपूर्ति और बिजली उत्पादन को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
किशाऊ बांध परियोजना पर छह राज्यों की सहमति को उत्तर भारत के जल प्रबंधन के लिए अहम कदम माना जा रहा है। लंबे समय से चले आ रहे मतभेदों के बाद हुआ यह समझौता अब परियोजना को मंजूरी और निर्माण की दिशा में आगे ले जाने का आधार बनेगा।




