भारत के सबसे भरोसेमंद कारोबारी घरानों में गिने जाने वाले टाटा ग्रुप के अंदर इस समय बड़ा नेतृत्व विवाद सामने आया है। मुंबई के बॉम्बे हाउस में टाटा सन्स की चेयरमैनशिप और कंपनी की संभावित शेयर बाजार लिस्टिंग को लेकर मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। इस विवाद में नोएल टाटा और एन. चंद्रशेखरन अलग-अलग पक्षों में दिखाई दे रहे हैं। आगे पढ़ें पूरी खबर…

आखिर टाटा ग्रुप में विवाद किस बात पर है?
विवाद दो बड़े मुद्दों पर केंद्रित है:
- एन. चंद्रशेखरन को टाटा सन्स का चेयरमैन अगले 5 साल के लिए फिर नियुक्त किया गया।
- टाटा सन्स को शेयर बाजार में लिस्ट करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाने का फैसला लिया गया।
टाटा सन्स के बोर्ड ने इन फैसलों को मंजूरी दी, लेकिन टाटा ट्रस्ट्स ने इनका विरोध दर्ज कराया।
नोएल टाटा ने क्यों जताई आपत्ति?
टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा का कहना है कि चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति कंपनी के नियमों के अनुरूप नहीं है। ट्रस्ट्स का दावा है कि पहले ही उनके पद छोड़ने के फैसले को स्वीकार किया जा चुका था और अब उसे पलटना उचित नहीं है।
लिस्टिंग पर क्यों मचा बवाल?
RBI ने टाटा सन्स को नियामकीय नियमों के तहत लिस्टिंग की दिशा में कदम बढ़ाने को कहा है। दूसरी ओर, टाटा ट्रस्ट्स का मानना है कि लिस्टिंग से समूह की परोपकारी और पारंपरिक संरचना प्रभावित हो सकती है।
अब आगे क्या होगा?
फिलहाल बोर्ड ने चंद्रशेखरन के कार्यकाल विस्तार और लिस्टिंग प्रक्रिया को मंजूरी दी है, लेकिन टाटा ट्रस्ट्स के विरोध के चलते अंतिम फैसला आगे की कॉर्पोरेट और कानूनी प्रक्रियाओं पर निर्भर करेगा। यह विवाद टाटा ग्रुप के भविष्य और उसकी गवर्नेंस पर महत्वपूर्ण असर डाल सकता है।




