उद्योगपति अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस पावर पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। विदेशी मुद्रा नियमों के कथित उल्लंघन से जुड़े मामले में एजेंसी ने भारत में कंपनी की ₹2,032.81 करोड़ की संपत्तियों को जब्त करने का आदेश दिया है। इस कार्रवाई में सासन पावर के शेयर और बैंक में जमा रकम भी शामिल हैं। लेकिन करीब दो दशक पुराने विदेशी निवेश से जुड़ा यह मामला आखिर क्या है और कंपनी ने ED की कार्रवाई पर क्या कहा है? आगे पढ़ें पूरी खबर।

₹2,032 करोड़ की संपत्ति पर ED की कार्रवाई
प्रवर्तन निदेशालय ने 14 अक्टूबर 2026 को सामने आई जानकारी के अनुसार, अनिल अंबानी समूह की रिलायंस पावर लिमिटेड की ₹2,032.81 करोड़ की संपत्तियों को विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) के तहत जब्त करने का आदेश दिया है।
एजेंसी के मुताबिक, यह कार्रवाई विदेश में कथित तौर पर रखी गई विदेशी मुद्रा और उससे जुड़े लेन-देन की जांच के तहत की गई है। ED का कहना है कि जब्त संपत्तियों का मूल्य उस विदेशी मुद्रा के बराबर है, जिसे कथित तौर पर FEMA के प्रावधानों का उल्लंघन करते हुए विदेश में रखा गया था।
किन संपत्तियों को किया गया जब्त?
इस कार्रवाई में रिलायंस पावर की सहायक कंपनी सासन पावर लिमिटेड में हिस्सेदारी और कंपनी के बैंक बैलेंस शामिल हैं।
रिपोर्टों के मुताबिक, सासन पावर के शेयरों का मूल्य करीब ₹2,026.65 करोड़ है, जबकि बैंक में जमा लगभग ₹6.16 करोड़ की रकम भी इस आदेश के दायरे में है। इस तरह कुल जब्त संपत्तियों का मूल्य ₹2,032.81 करोड़ बताया गया है।
यह कार्रवाई FEMA की धारा 37A के तहत की गई है। इस प्रावधान के तहत कथित तौर पर नियमों के विरुद्ध विदेश में रखी गई विदेशी मुद्रा के बराबर भारत में संपत्तियों को जब्त किया जा सकता है।
आखिर किस मामले में हुई कार्रवाई?
ED की जांच भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) से मिली जानकारी के बाद शुरू हुई। एजेंसी के अनुसार, रिलायंस पावर के खातों में करीब ₹2,101.46 करोड़ के राइट-ऑफ और वित्तीय प्रावधान दर्ज किए गए थे।
जांच में इनका संबंध ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स (BVI) और केमैन आइलैंड्स में स्थित कंपनियों को किए गए विदेशी निवेश और अग्रिम भुगतान से जोड़ा गया। ED इन लेन-देन और विदेशी कंपनियों के जरिए धन के इस्तेमाल की जांच कर रही है।
2006 के विदेशी बॉन्ड और 2008 के निवेश की भी जांच
जांच एजेंसी के मुताबिक, रिलायंस नेचुरल रिसोर्सेज लिमिटेड, जिसका बाद में रिलायंस पावर में विलय हो गया, ने वर्ष 2006 में विदेशी मुद्रा में कन्वर्टिबल बॉन्ड जारी कर धन जुटाया था।
ED के अनुसार, इस धन का एक बड़ा हिस्सा सिंगापुर स्थित सहायक कंपनी में निवेश किया गया। इसके बाद रकम को स्विट्जरलैंड के जिनेवा स्थित Deutsche Bank (Suisse) SA में जमा कराया गया। एजेंसी का आरोप है कि इन जमाओं को ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स में पंजीकृत कंपनियों को दिए गए कर्ज के लिए गारंटी के रूप में इस्तेमाल किया गया।
ED यह भी आरोप लगा रही है कि इन विदेशी कंपनियों के जरिए रकम का इस्तेमाल अलग-अलग उद्देश्यों के लिए हुआ, जिसमें मॉरीशस स्थित विदेशी कंपनियों के माध्यम से धन को वापस भारत लाने की प्रक्रिया भी शामिल थी। ये एजेंसी के आरोप हैं, जिनकी जांच जारी है।
रिलायंस पावर ने क्या कहा?
रिलायंस पावर ने ED की कार्रवाई पर अपना पक्ष रखते हुए आरोपों से असहमति जताई है। कंपनी के अनुसार, यह आदेश 2006 में जारी विदेशी मुद्रा कन्वर्टिबल बॉन्ड और 2008 में सिंगापुर स्थित सहायक कंपनी के माध्यम से किए गए विदेशी निवेश से संबंधित है।
कंपनी का कहना है कि संबंधित लेन-देन के लिए आवश्यक मंजूरियां ली गई थीं। उसने यह भी बताया कि सासन पावर में उसके शेयर पहले से ही सरकारी कंपनी पावर फाइनेंस कॉर्पोरेशन (PFC) के पक्ष में दस साल से अधिक समय से सुरक्षा व्यवस्था के तहत गिरवी रखे गए हैं।
रिलायंस पावर के मुताबिक, वह इस कार्रवाई के प्रभावों का आकलन कर रही है और अपने तथा शेयरधारकों के हितों की रक्षा के लिए कानूनी सलाह के अनुसार उचित कदम उठाएगी।
क्या अब कंपनी इन संपत्तियों का इस्तेमाल कर सकेगी?
जब्ती के आदेश के तहत संबंधित संपत्तियों को बेचने, हस्तांतरित करने, दोबारा गिरवी रखने या अन्य तरीके से उनका निपटान करने पर रोक लग सकती है। हालांकि, कंपनी ने स्पष्ट किया है कि यह आदेश अस्थायी प्रकृति का है और कानून के तहत सक्षम प्राधिकारी की पुष्टि के अधीन है।
कंपनी ने यह भी कहा है कि इस आदेश के तहत उस पर कोई वित्तीय जुर्माना नहीं लगाया गया है। इसलिए इस कार्रवाई को अंतिम दंड के रूप में नहीं, बल्कि जांच से जुड़ी कानूनी प्रक्रिया के हिस्से के रूप में समझना चाहिए।
आगे क्या होगा?
अब इस मामले में ED की जांच, जब्ती आदेश की कानूनी प्रक्रिया और कंपनी की ओर से उठाए जाने वाले कदम महत्वपूर्ण होंगे। जांच एजेंसी के आरोपों और कंपनी के पक्ष के बीच अंतर को देखते हुए आगे की कार्रवाई पर नजर रहेगी।





