उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले नई हलचल शुरू हो गई है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने संविधान दिवस पर पार्टी का घोषणापत्र जारी करने की तारीख तय कर दी है। ‘जन-मन का मैनीफेस्टो’ के जरिए पार्टी PDA यानी पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक वर्गों से जुड़े मुद्दों को सामने रखने की तैयारी में है। लेकिन इस प्रणपत्र में कौन-से वादे होंगे और क्या यह चुनावी मुकाबले की दिशा तय करेगा? आगे पढ़ें पूरी खबर।

अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर किया ऐलान
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने 19 अक्टूबर 2026 को घोषणा की कि पार्टी 26 नवंबर को अपना घोषणापत्र जारी करेगी। उन्होंने इसे ‘जन-मन का मैनीफेस्टो’ नाम दिया है।
अखिलेश ने अपने संदेश में ‘सत्ताइस का संकल्प: PDA का प्रणपत्र’ का उल्लेख किया। यह घोषणा ऐसे समय हुई है, जब सभी प्रमुख राजनीतिक दल 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुटे हैं।
PDA के जरिए किन वर्गों पर नजर?
समाजवादी पार्टी की PDA रणनीति का अर्थ पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक वर्गों को एक साझा राजनीतिक मंच पर लाना है। पार्टी इन वर्गों से जुड़े सामाजिक न्याय, समान अवसर और अधिकारों के मुद्दों को अपनी राजनीति में प्रमुखता देती रही है।
आगामी घोषणापत्र में इन विषयों से जुड़े प्रस्तावों को जगह मिल सकती है, लेकिन अभी पार्टी ने सभी वादों और योजनाओं का विस्तृत ब्योरा जारी नहीं किया है।
संविधान दिवस पर ही क्यों जारी होगा घोषणापत्र?
26 नवंबर को देश में संविधान दिवस मनाया जाता है। इस तारीख का संबंध भारतीय संविधान को अंगीकार किए जाने से है।
समाजवादी पार्टी ने घोषणापत्र जारी करने के लिए इसी दिन को चुना है। राजनीतिक तौर पर इसे संविधान, समानता और सामाजिक न्याय से जुड़े संदेश को प्रमुखता देने की कोशिश के रूप में देखा जा सकता है।
बीजेपी और सपा के बीच बढ़ेगा चुनावी मुकाबला?
2027 के विधानसभा चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश में बीजेपी और समाजवादी पार्टी के बीच राजनीतिक प्रतिस्पर्धा तेज होने की संभावना है। सपा अपने PDA फॉर्मूले के जरिए सामाजिक गठजोड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है।
हालांकि, घोषणापत्र की वास्तविक दिशा और उसका चुनावी प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि उसमें कौन-से वादे किए जाते हैं और पार्टी उन्हें जनता के सामने किस तरह रखती है।





