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अस्पतालों में इस्तेमाल हो चुके मेडिकल उपकरण दोबारा नहीं चलेंगे! केंद्र का सख्त निर्देश

अस्पतालों में मरीजों की सुरक्षा को लेकर केंद्र सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। सरकार ने सरकारी और निजी अस्पतालों में एक बार इस्तेमाल होने वाले मेडिकल उपकरणों और डिस्पोजेबल सर्जिकल सामान को दोबारा इस्तेमाल करने पर रोक का कड़ाई से पालन कराने के निर्देश दिए हैं। यह कदम उन रिपोर्टों के बाद उठाया गया है, जिनमें कुछ अस्पतालों में इस्तेमाल किए गए उपकरणों को स्टरलाइज करके फिर से उपयोग करने की बात सामने आई थी। इससे संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है और मरीजों से नए उपकरणों की पूरी कीमत वसूलने का सवाल भी उठता है। आगे पढ़ें पूरी खबर।

केंद्र सरकार ने क्यों जारी किए निर्देश?

स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (DGHS) ने 16 अक्टूबर 2026 को राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के अधिकारियों को पत्र लिखकर सिंगल-यूज मेडिकल डिवाइस और डिस्पोजेबल सर्जिकल सामान के दोबारा इस्तेमाल पर सख्ती से रोक लागू कराने को कहा।

निर्देश के अनुसार, कुछ निजी और कॉरपोरेट अस्पतालों में ऐसे उपकरणों को स्टरलाइज करने के बाद फिर से इस्तेमाल किए जाने की शिकायतें मिली थीं, जिन्हें केवल एक बार उपयोग के लिए बनाया गया है। स्वास्थ्य विभाग ने इसे मरीजों की सुरक्षा, संक्रमण नियंत्रण और चिकित्सा नियमों के पालन से जुड़ा गंभीर मामला बताया है।

केंद्र ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से अस्पतालों की निगरानी बढ़ाने और नियमों का उल्लंघन होने पर उचित कार्रवाई करने को कहा है।

 

किन मेडिकल उपकरणों पर लागू होगी रोक?

सिंगल-यूज मेडिकल डिवाइस ऐसे उपकरण होते हैं, जिन्हें निर्माता के निर्देशों के अनुसार एक मरीज या एक प्रक्रिया में इस्तेमाल करने के बाद दोबारा उपयोग के लिए नहीं बनाया जाता। इनमें कई तरह के मेडिकल और सर्जिकल उपकरण शामिल हैं।

 

रिपोर्टों में जिन उपकरणों के दोबारा इस्तेमाल को लेकर चिंता जताई गई है, उनमें शामिल हैं:

– कार्डियक कैथेटर और गाइडवायर: दिल से जुड़ी प्रक्रियाओं में इस्तेमाल होने वाले उपकरण।

– बैलून और एब्लेशन कैथेटर: कुछ हृदय संबंधी उपचारों में उपयोग किए जाने वाले उपकरण।

– डायलाइजर और ब्लड ट्यूबिंग: डायलिसिस प्रक्रिया में इस्तेमाल होने वाले उपकरण।

– सर्जिकल स्टेपलर और लैप्रोस्कोपिक ट्रोकार: कुछ सर्जरी में इस्तेमाल होने वाले उपकरण।

– ऑर्थोपेडिक ड्रिल बिट्स: हड्डियों से संबंधित सर्जरी में इस्तेमाल होने वाले उपकरण।

– सुई और सिरिंज: एक बार इस्तेमाल के लिए निर्धारित होने पर इन्हें दोबारा उपयोग नहीं किया जाना चाहिए।

ध्यान रहे कि रोक का दायरा उपकरण के प्रकार, निर्माता के निर्देशों और लागू नियमों के अनुसार तय होता है। हर मेडिकल उपकरण को सिंगल-यूज नहीं माना जाता।

 

दोबारा इस्तेमाल से मरीजों को क्या खतरा हो सकता है?

एक बार इस्तेमाल के लिए बनाए गए उपकरण को साफ या स्टरलाइज करने के बाद भी दोबारा इस्तेमाल करना सुरक्षित नहीं माना जा सकता। ऐसे उपकरणों में जैविक अवशेष रह सकते हैं या उनकी कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है।

स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय ने चेतावनी दी है कि इस तरह की लापरवाही से मरीजों में संक्रमण फैलने, उपकरण के खराब होने और इलाज के दौरान जटिलताएं पैदा होने का खतरा रहता है। संक्रमित उपकरणों के अनुचित इस्तेमाल से हेपेटाइटिस B, हेपेटाइटिस C, HIV और बैक्टीरियल संक्रमण का जोखिम भी हो सकता है।

इसलिए केवल उपकरण को धोना या स्टरलाइज करना उसे दोबारा इस्तेमाल के लिए सुरक्षित साबित नहीं करता। मेडिकल उपकरण का उपयोग निर्धारित मानकों और निर्माता के निर्देशों के मुताबिक ही होना चाहिए।

 

मरीजों से पूरे पैसे वसूलने का मामला भी उठा

इस निर्देश के पीछे केवल संक्रमण का खतरा ही नहीं, बल्कि मेडिकल बिलिंग से जुड़ी चिंता भी है। स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय को ऐसी रिपोर्टें मिली थीं कि कुछ मामलों में दोबारा इस्तेमाल किए गए उपकरणों की पूरी कीमत मरीजों से वसूली जा रही थी या संबंधित सरकारी एजेंसियों से उसका भुगतान लिया जा रहा था।

ऐसी स्थिति में मरीजों को यह जानने का अधिकार है कि उनके इलाज में इस्तेमाल किए गए उपकरणों का बिल किस आधार पर बनाया गया है। अस्पतालों को चिकित्सा सामान के इस्तेमाल और बिलिंग में पारदर्शिता रखनी चाहिए।

हालांकि, रिपोर्टों में सामने आए आरोपों को सभी अस्पतालों पर लागू नहीं माना जा सकता। निर्देश का उद्देश्य नियमों का पालन सुनिश्चित करना और मरीजों की सुरक्षा मजबूत करना है।

 

नियम तोड़ने वाले अस्पतालों पर क्या होगा?

केंद्र ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के अधिकारियों से अस्पतालों में निरीक्षण और निगरानी सुनिश्चित करने को कहा है। इसमें स्वास्थ्य विभाग, औषधि नियंत्रक और संबंधित नियामक अधिकारियों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।

नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर लागू कानूनों और नियमों के तहत कार्रवाई की जा सकती है। संबंधित प्रावधानों में ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940, मेडिकल डिवाइस रूल्स, 2017 और क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट्स एक्ट, 2010 शामिल हो सकते हैं। कार्रवाई उल्लंघन की प्रकृति और लागू कानूनी प्रावधानों के आधार पर होगी।

 

मरीजों को क्या ध्यान रखना चाहिए?

मरीज या उनके परिजन इलाज के बिल में इस्तेमाल किए गए मेडिकल उपकरणों की जानकारी मांग सकते हैं। किसी उपकरण को लेकर संदेह होने पर अस्पताल के संबंधित विभाग या शिकायत निवारण अधिकारी से स्पष्टीकरण लिया जा सकता है।

हालांकि, मरीजों के लिए हर प्रक्रिया में इस्तेमाल होने वाले उपकरण की तकनीकी जांच करना संभव नहीं है। इसलिए अस्पतालों की जिम्मेदारी है कि वे निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन करें और मेडिकल उपकरणों का इस्तेमाल निर्माता के निर्देशों के अनुसार करें।

केंद्र के इस निर्देश का मुख्य उद्देश्य मरीजों को संक्रमण के जोखिम से बचाना, मेडिकल उपकरणों के सुरक्षित इस्तेमाल को सुनिश्चित करना और अस्पतालों में बिलिंग की जवाबदेही बढ़ाना है।

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