भोपाल, 29 जुलाई। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश तबस्सुम खान की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने यह आदेश उस समय दिया जब मॉब लिंचिंग मामले में दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाने के बाद उन्हें कथित तौर पर सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से धमकियां मिलने की खबरें सामने आईं।
हाईकोर्ट ने इस मामले का स्वतः संज्ञान (सुओ मोटू) लेते हुए कहा कि न्यायिक अधिकारियों को धमकी देना न्यायपालिका की स्वतंत्रता और निष्पक्ष कार्यप्रणाली को सीधे प्रभावित करता है। अदालत ने राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) और गृह विभाग से पूछा है कि संबंधित न्यायाधीश की सुरक्षा और आरोपियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई है।

मामला वर्ष 2022 के मॉब लिंचिंग कांड से जुड़ा है। जज तबस्सुम खान ने इस मामले में कई आरोपियों को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। फैसले के बाद उनके खिलाफ कथित तौर पर आपत्तिजनक पोस्ट, धमकियां और सोशल मीडिया पर अभियान चलाए जाने की शिकायतें सामने आईं, जिसके बाद पुलिस ने एफआईआर भी दर्ज की।
हाईकोर्ट ने नर्मदापुरम के पुलिस अधीक्षक को न्यायाधीश को पर्याप्त सुरक्षा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। साथ ही राज्य सरकार से कहा है कि दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि न्यायिक अधिकारियों को बिना किसी भय या दबाव के स्वतंत्र रूप से कार्य करने का अधिकार है। ऐसे मामलों में कानून का सख्ती से पालन कराया जाना न्याय व्यवस्था की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए आवश्यक है।


