चंडीगढ़, 29 जुलाई। केंद्र सरकार के प्रस्तावित नकल विरोधी कानून को लेकर कानूनी बहस तेज हो गई है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के एक अधिवक्ता ने कानून के कुछ प्रावधानों पर सवाल उठाते हुए कहा है कि परीक्षा में नकल और पेपर लीक रोकना जरूरी है, लेकिन इसके साथ-साथ यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि किसी निर्दोष छात्र, अभिभावक या कर्मचारी के अधिकार प्रभावित न हों।

अधिवक्ता का कहना है कि कानून का उद्देश्य पूरी तरह उचित है, लेकिन इसके क्रियान्वयन में पारदर्शिता और जवाबदेही भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने सुझाव दिया कि जांच एजेंसियों के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश तय किए जाएं, ताकि कार्रवाई केवल दोषी व्यक्तियों तक सीमित रहे और किसी भी निर्दोष व्यक्ति को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।
उन्होंने यह भी कहा कि नकल और पेपर लीक जैसे मामलों पर कठोर कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन कानून में ऐसी व्यवस्था भी होनी चाहिए जिससे निष्पक्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया सुनिश्चित हो सके। उनके अनुसार, किसी भी नए कानून की सफलता उसके संतुलित और पारदर्शी क्रियान्वयन पर निर्भर करती है।
गौरतलब है कि हाल के दिनों में केंद्र और हरियाणा सरकार सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक और नकल रोकने के लिए सख्त कानूनी व्यवस्था की आवश्यकता पर जोर देती रही हैं। सरकार का कहना है कि ऐसे कानूनों का उद्देश्य ईमानदार अभ्यर्थियों के हितों की रक्षा करना और भर्ती एवं परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बनाए रखना है।


