नागपंचमी पर नागचंद्रेश्वर मंदिर में उमड़ी भारी भीड़, धक्का-मुक्की के बाद मची अफरा-तफरी; सुरक्षा बलों ने संभाला मोर्चा
उज्जैन, मध्य प्रदेश: नागपंचमी के अवसर पर उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर परिसर में सोमवार को भारी भीड़ के चलते भगदड़ जैसे हालात बन गए। महाकाल परिसर स्थित नागचंद्रेश्वर मंदिर में दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे थे। भीड़ बढ़ने के बाद अचानक धक्का-मुक्की शुरू हो गई, जिससे कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। इस दौरान तीन श्रद्धालुओं की तबीयत बिगड़ने की जानकारी सामने आई है।

नागपंचमी पर उमड़ी श्रद्धालुओं की भारी भीड़
नागचंद्रेश्वर मंदिर के कपाट साल में केवल एक बार नागपंचमी के दिन खोले जाते हैं। इसी वजह से देश के अलग-अलग हिस्सों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान नागचंद्रेश्वर के दर्शन के लिए उज्जैन पहुंचे। मंदिर परिसर के साथ-साथ आसपास के रास्तों पर भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जमा हो गई थी। हरसिद्धि मंदिर और बड़े गणेश मंदिर के आसपास भी बड़ी संख्या में लोग नजर आए।
धक्का-मुक्की के बाद बिगड़े हालात
श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ने के बीच मंदिर मार्ग पर अचानक धक्का-मुक्की शुरू हो गई। कुछ समय के लिए स्थिति इतनी बिगड़ गई कि भगदड़ जैसे हालात बन गए। भीड़ में दबने के कारण तीन लोगों के घायल होने की सूचना है। घटना के बाद मौके पर मौजूद पुलिस और प्रशासन की टीम ने तुरंत मोर्चा संभाला और भीड़ को नियंत्रित करने का प्रयास किया।
सुरक्षा बलों ने संभाली व्यवस्था
घटना के बाद सुरक्षाकर्मियों ने श्रद्धालुओं की भीड़ को नियंत्रित किया और मंदिर मार्ग पर व्यवस्था बनाने की कोशिश की। मौके पर मौजूद लोगों और सुरक्षा बलों की मदद से स्थिति को संभाला गया। प्रशासन ने मंदिर क्षेत्र में सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन को लेकर सतर्कता बढ़ा दी है।
तीन श्रद्धालुओं को अस्पताल पहुंचाया गया
धक्का-मुक्की और भीड़ में दबने के बाद तीन श्रद्धालुओं की तबीयत बिगड़ गई। उन्हें तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई गई। प्राथमिक उपचार के बाद घायलों को जिला चिकित्सालय ले जाया गया, जहां उनका उपचार जारी है। फिलहाल घायलों की विस्तृत स्थिति को लेकर आधिकारिक जानकारी का इंतजार है।
साल में सिर्फ एक दिन खुलते हैं कपाट
नागचंद्रेश्वर मंदिर महाकालेश्वर मंदिर परिसर की तीसरी मंजिल पर स्थित है। धार्मिक परंपरा के अनुसार मंदिर के कपाट साल में केवल एक बार नागपंचमी के अवसर पर श्रद्धालुओं के लिए खोले जाते हैं। दर्शन का अवसर सीमित होने के कारण नागपंचमी पर यहां लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की परंपरा रही है।
नागचंद्रेश्वर मंदिर में भगवान शिव और माता पार्वती की शेषनाग के फनों की छाया में विराजमान दुर्लभ प्रतिमा स्थापित है। मंदिर की धार्मिक और ऐतिहासिक मान्यता के कारण नागपंचमी पर यहां विशेष आस्था देखने को मिलती है।
फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता श्रद्धालुओं की भीड़ को व्यवस्थित करना और मंदिर परिसर में सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना है। घटना के कारणों और घायलों की स्थिति को लेकर आधिकारिक जानकारी सामने आने का इंतजार है।

