हरियाणा के भिवानी में किसानों ने टावर लाइन के मुआवजे और फसल नुकसान को लेकर प्रदर्शन किया। अखिल भारतीय किसान सभा के आह्वान पर किसानों ने जिले को सूखाग्रस्त घोषित करने, फसलों के नुकसान का मुआवजा देने और टावर लाइन के लिए उचित मुआवजा तय करने की मांग उठाई। किसानों ने जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपते हुए मांगें पूरी नहीं होने पर आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी। टावर लाइन को लेकर किसानों और प्रशासन के बीच विवाद पहले भी सामने आता रहा है। भिवानी के प्रभावित किसान टावर लगाने से होने वाले नुकसान के लिए उचित मुआवजे की मांग करते रहे हैं। आगे पढ़ें पूरी खबर।

सूखा घोषित करने और 50 हजार रुपये प्रति एकड़ मुआवजे की मांग
किसान सभा के बैनर तले प्रदर्शन कर रहे किसानों ने भिवानी जिले को सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग की। किसानों का कहना है कि कम बारिश के कारण खरीफ फसलों को नुकसान हुआ है। उन्होंने तुरंत क्षतिपूर्ति पोर्टल खोलने, विशेष गिरदावरी कराने और 50 हजार रुपये प्रति एकड़ मुआवजा देने की मांग रखी।
किसानों ने इसके साथ ही नहरों में पर्याप्त पानी उपलब्ध कराने की मांग भी प्रशासन के सामने रखी।
भिवानी जिले में सूखे और फसल मुआवजे को लेकर किसान संगठनों की मांगें पहले भी सामने आती रही हैं। सितंबर 2026 में सिवानी क्षेत्र के किसानों ने भी सूखाग्रस्त घोषित करने और 50 हजार रुपये प्रति एकड़ मुआवजे की मांग को लेकर प्रदर्शन किया था।
बलियाली में टावर लगाने पहुंची कंपनी, किसानों ने रुकवाया काम
प्रदर्शन के दौरान किसानों को सूचना मिली कि बलियाली गांव में टावर लाइन कंपनी की ओर से टावर लगाने का काम किया जा रहा है। इसके बाद किसान मौके पर पहुंचे और काम का विरोध किया।
किसान नेताओं के मुताबिक, मौके पर पुलिस ने किसानों को रोकने का प्रयास किया। किसानों ने पुलिस बैरिकेडिंग का भी विरोध किया और उनके वाहनों को जब्त किए जाने का आरोप लगाया।
विरोध बढ़ने के बाद किसानों ने मौके पर टावर लगाने का काम रुकवा दिया।
मुआवजे को लेकर क्या है किसानों का विवाद?
किसान नेता जगरोषण के मुताबिक, भिवानी में करीब डेढ़ साल से टावर लाइन के मुआवजे को लेकर विवाद चल रहा है। किसानों का आरोप है कि उन्हें जमीन के नुकसान के मुकाबले पर्याप्त मुआवजा नहीं दिया जा रहा।
किसानों का दावा है कि पड़ोसी हिसार जिले में टावर लाइन के लिए करीब 1.50 करोड़ से 2.25 करोड़ रुपये प्रति एकड़ तक मुआवजा मिला है, जबकि भिवानी में किसानों को 35 से 37 लाख रुपये प्रति एकड़ का मुआवजा दिया जा रहा है। किसानों ने इस राशि को अपर्याप्त बताते हुए इसे स्वीकार करने से इनकार किया है।
भिवानी में टावर लाइन से प्रभावित किसानों की ओर से बाजार दर के अनुसार मुआवजे की मांग पहले भी उठाई गई है। जून 2026 में किसानों की एक बैठक में भी उचित और एकमुश्त मुआवजे की मांग प्रशासन के सामने रखी गई थी।
‘उचित मुआवजा मिलने तक नहीं लगाने देंगे टावर’
किसान नेताओं ने स्पष्ट किया कि जब तक उन्हें उचित और वाजिब मुआवजा नहीं मिलता, तब तक खेतों में टावर लगाने का काम नहीं होने दिया जाएगा।
किसानों का कहना है कि टावर और हाईटेंशन लाइन के कारण खेतों के इस्तेमाल पर असर पड़ता है। टावर लाइन को लेकर भिवानी के अन्य क्षेत्रों में भी किसान मुआवजे और जमीन के उपयोग से जुड़े सवाल उठाते रहे हैं।
कल प्रशासन के साथ होगी बैठक
अखिल भारतीय किसान सभा के नेता दयानंद पूनिया के अनुसार, जिला प्रशासन के साथ अगली बैठक सुबह 11 बजे DRDA हॉल में होगी। उन्होंने किसानों से अधिक से अधिक संख्या में बलियाली पहुंचने की अपील की है।
अब किसानों और प्रशासन के बीच होने वाली बैठक में टावर लाइन के मुआवजे, काम और किसानों की अन्य मांगों पर क्या सहमति बनती है, इस पर नजर रहेगी। किसानों ने कहा है कि मांगों का समाधान नहीं हुआ तो आगे आंदोलन की रणनीति तय की जाएगी।





