दक्षिण-पूर्वी दिल्ली के आली गांव (सरिता विहार क्षेत्र) में करीब 1,800 मकानों और दुकानों पर बेदखली का संकट मंडरा रहा है। कोर्ट के आदेश के बाद उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग की जमीन खाली कराने की प्रक्रिया तेज हो गई है। नोटिस मिलने के बाद इलाके में लोगों का विरोध प्रदर्शन भी शुरू हो गया है।आगे पढ़ें पूरी खबर।

क्या है पूरा मामला?
आली गांव में उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग की 8.48 एकड़ जमीन पर बने करीब 1,500 मकान और दुकानें तथा पीर मोहल्ले के लगभग 300 मकानों पर कोर्ट द्वारा नियुक्त बैलिफ ने नोटिस चस्पा किए हैं। लोगों को तय समय सीमा तक मकान-दुकान खाली करने के लिए कहा गया है।
नोटिस में क्या कहा गया?
नोटिस के अनुसार, यदि निर्धारित समय तक लोग खुद जगह खाली नहीं करते हैं तो प्रशासन पुलिस बल की मौजूदगी में कब्जा हटाने की कार्रवाई करेगा और जमीन उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग को सौंप दी जाएगी।
दो दशक पुराना है जमीन विवाद
यह विवाद 20 साल से ज्यादा पुराना बताया जा रहा है। दिल्ली के केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद यमुना किनारे की कुछ जमीनें उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग को मिली थीं। विभाग का दावा है कि बाद में इन जमीनों पर अवैध कब्जे हो गए। अदालत ने पहले और बाद में हाईकोर्ट ने भी विभाग के पक्ष में फैसला सुनाया।
इलाके में विरोध प्रदर्शन
नोटिस मिलने के बाद बड़ी संख्या में स्थानीय लोग धरने पर बैठ गए। उनका कहना है कि वे वर्षों से यहां रह रहे हैं और उनके पास आधार कार्ड, वोटर आईडी, बिजली-पानी के बिल जैसे दस्तावेज मौजूद हैं। वहीं प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई न्यायालय के आदेश के तहत की जा रही है।




