दिल्ली पुलिस मुख्यालय के बाहर अपने तबादले के खिलाफ आवाज उठाने वाले ACP मनस्वी वशिष्ठ पर अब बड़ी कार्रवाई हुई है। गृह मंत्रालय ने उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई शाहदरा थाने में पुलिसकर्मियों और वकीलों के बीच हुई झड़प के बाद शुरू हुए विवाद और पुलिसकर्मियों के प्रदर्शन के बीच हुई है। आखिर ACP के तबादले से शुरू हुआ मामला निलंबन तक कैसे पहुंचा? आगे पढ़ें पूरी खबर।

पुलिस मुख्यालय के बाहर जुटे थे सैकड़ों पुलिसकर्मी
सोमवार, 2 नवंबर को दिल्ली पुलिस के कई पुलिसकर्मी मुख्यालय के बाहर जुटे थे। वे ACP मनस्वी वशिष्ठ और शाहदरा थाने के तत्कालीन SHO इंस्पेक्टर अरुण कुमार के तबादले का विरोध कर रहे थे। दोनों अधिकारियों को 23 अक्टूबर को शाहदरा थाने में वकीलों और पुलिसकर्मियों के बीच हुई झड़प के बाद स्थानांतरित किया गया था।
शुरुआत में करीब 100 पुलिसकर्मी मुख्यालय के गेट नंबर-1 के बाहर पहुंचे। बाद में यह संख्या बढ़कर लगभग 500 तक बताई गई। प्रदर्शन कर रहे पुलिसकर्मियों की मांग थी कि दोनों अधिकारियों के तबादले पर दोबारा विचार किया जाए और उनकी बात वरिष्ठ अधिकारियों के सामने रखी जाए।
ACP मनस्वी वशिष्ठ को क्यों किया गया सस्पेंड?
प्रदर्शन के अगले दिन ACP मनस्वी वशिष्ठ के निलंबन की जानकारी सामने आई। गृह मंत्रालय के आदेश के मुताबिक, उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है और उनके खिलाफ विभागीय कार्यवाही प्रस्तावित है। आदेश में प्रस्तावित विभागीय कार्यवाही के विशिष्ट आधारों का विस्तार से उल्लेख नहीं किया गया।
निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय दिल्ली रहेगा और सक्षम प्राधिकारी की पूर्व अनुमति के बिना वे मुख्यालय नहीं छोड़ सकेंगे। नियमों के तहत उन्हें निर्धारित शर्तों के अधीन निर्वाह भत्ता भी मिलेगा।
23 अक्टूबर को शाहदरा थाने में क्या हुआ था?
इस पूरे विवाद की शुरुआत 23 अक्टूबर को शाहदरा पुलिस थाने में हुई घटना से हुई थी। वहां एक झड़प के दौरान अधिवक्ता ललित बंसल के सिर में गंभीर चोट लगने की बात सामने आई थी। इसके बाद वकीलों ने पुलिसकर्मियों पर दुर्व्यवहार और धमकी देने के आरोप लगाए। कुछ वकीलों ने आरोप लगाया कि ACP ने अपना सर्विस रिवॉल्वर दिखाकर धमकाया था। ये आरोप हैं, जिनकी जांच और कानूनी प्रक्रिया अलग विषय है।
घटना के बाद दिल्ली की जिला अदालतों में वकीलों ने कामकाज से दूरी बनाते हुए हड़ताल शुरू कर दी थी। 28 अक्टूबर को दोनों पुलिस अधिकारियों के तबादले के बाद वकीलों ने हड़ताल वापस ले ली थी।
पुलिसकर्मियों ने उठाए थे ये मुद्दे
तबादलों से नाराज पुलिसकर्मियों ने सोमवार को मुख्यालय के बाहर अपनी मांगें रखीं। उनका कहना था कि ड्यूटी के दौरान पुलिसकर्मियों की सुरक्षा, सम्मान और शिकायतों के समाधान के लिए स्पष्ट व्यवस्था होनी चाहिए। वकीलों के साथ विवाद की स्थिति में पुलिसकर्मियों के लिए एक तय SOP और शिकायत निवारण तंत्र बनाने की मांग भी उठी।
प्रदर्शन के बाद पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार और वरिष्ठ अधिकारियों ने पुलिसकर्मियों के साथ संवाद किया। दिल्ली पुलिस की ओर से बताया गया कि पुलिसकर्मियों की पदोन्नति, MACP, आवास और सेवा से जुड़े मुद्दों पर समयबद्ध कार्रवाई की जाएगी। बार काउंसिल और बार एसोसिएशन के प्रतिनिधियों के साथ संयुक्त समन्वय समिति बनाने की बात भी कही गई।
अब आगे क्या होगा?
ACP मनस्वी वशिष्ठ के निलंबन के बाद पुलिस और वकीलों के बीच चल रहे विवाद में नया मोड़ आ गया है। एक ओर पुलिसकर्मी अपने अधिकारियों के तबादले और सेवा संबंधी शिकायतों को लेकर सवाल उठा रहे थे, वहीं दूसरी ओर वकीलों ने शाहदरा थाने की घटना में कार्रवाई की मांग की थी। अब विभागीय कार्यवाही और इस पूरे विवाद की जांच के अगले कदम पर सबकी नजर रहेगी।




