

हिसार से इस वक्त की बेहद भावुक कर देने वाली तस्वीरें सामने आई हैं।किसान आंदोलन से जुड़े रहे जीवन कुंडू का आज गांव किनाना में अंतिम संस्कार किया गया। जीवन की अंतिम विदाई में सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण, किसान प्रतिनिधि और समर्थक शामिल हुए और नम आंखों से उन्हें श्रद्धांजलि दी।सबसे भावुक कर देने वाला पल उस वक्त आया, जब महज 11 साल के बेटे रिशु ने अपने पिता को मुखाग्नि दी। पिता की चिता के सामने खड़ा यह मासूम शायद अभी ठीक से समझ भी नहीं पा रहा होगा कि जिस पिता के साथ कल तक जिंदगी थी, आज वही पिता हमेशा के लिए उससे दूर हो गए हैं।सुबह जब जीवन का शव अग्रोहा मेडिकल कॉलेज से घर पहुंचा, तो परिवार में मातम छा गया। पत्नी रमन शव को देखते ही बेसुध हो गईं। आसपास मौजूद महिलाओं ने किसी तरह उन्हें संभाला। वहीं अंतिम संस्कार के दौरान जीवन की बहन बार-बार अपने भाई को पुकारती नजर आईं—“भाई आजा… ओ भाई…” और यही दृश्य वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम कर गया।बताया गया कि 4 अगस्त को जीवन की हत्या के बाद आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर जीवन कुंडू संघर्ष समिति का गठन किया गया था। परिवार की ओर से मुख्य आरोपी समेत अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग उठाई जा रही थी।इसके बाद सरकार की ओर से कुछ मांगें माने जाने के बाद परिवार अंतिम संस्कार के लिए राजी हुआ। वहीं 15 अगस्त को हिंसा से जुड़े मामले में गिरफ्तार किसान नेताओं को गुरुग्राम की भोंडसी जेल से रिहा किया गया।लेकिन आज सवाल सिर्फ एक परिवार के गम का नहीं है सवाल उस 11 साल के मासूम का है, जिसने इतनी छोटी उम्र में पिता को अंतिम विदाई दी।एक तरफ सैकड़ों लोगों की भीड़ थी, दूसरी तरफ चिता के सामने खड़ा एक बच्चा… और बीच में थी एक ऐसी खामोशी, जिसमें पूरे परिवार का दर्द साफ दिखाई दे रहा था।जीवन की अंतिम यात्रा तो खत्म हो गई, लेकिन परिवार के लिए संघर्ष और इंसाफ की उम्मीद का सफर अभी बाकी है।

