भगवान श्रीकृष्ण जन्मोत्सव को लेकर इस बार लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल है कि व्रत 3 सितंबर (आज) रखा जाए या 4 सितंबर (कल)। इस बार जन्माष्टमी पर करीब 15 साल बाद एक दुर्लभ ज्योतिषीय संयोग बन रहा है, जिसके कारण पूजा का विशेष महत्व बताया जा रहा है।

आज या कल, कब रखें जन्माष्टमी का व्रत?
हिंदू पंचांग के अनुसार, इस वर्ष श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का व्रत 4 सितंबर 2026, शुक्रवार को रखा जाएगा। अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र का शुभ संयोग 4 सितंबर को पड़ रहा है, इसलिए अधिकांश पंचांग और ज्योतिषाचार्य इसी दिन व्रत और पूजा की सलाह दे रहे हैं।
हालांकि कुछ स्थानों पर मंदिरों और वैष्णव परंपरा के अनुसार तिथि में अंतर होने की वजह से 3 सितंबर को भी जन्माष्टमी मनाई जा रही है।
15 साल बाद बना खास संयोग
ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, इस बार जन्माष्टमी पर अष्टमी तिथि, रोहिणी नक्षत्र और शुक्रवार का दुर्लभ संयोग बन रहा है। माना जा रहा है कि ऐसा शुभ योग करीब 15 साल बाद देखने को मिला है, जिससे इस दिन पूजा-पाठ और व्रत का महत्व कई गुना बढ़ गया है।
पूजा के लिए सबसे शुभ 45 मिनट
4 सितंबर को भगवान श्रीकृष्ण की पूजा के लिए रात्रि 11:36 बजे से 12:21 बजे तक का समय सबसे उत्तम माना गया है। यही 45 मिनट का शुभ मुहूर्त है, जिसमें लड्डू गोपाल का जन्मोत्सव, अभिषेक और पूजा करना विशेष फलदायी माना जाता है।
जन्माष्टमी पूजा विधि
सुबह स्नान कर व्रत का संकल्प लें।
घर के मंदिर को साफ कर लड्डू गोपाल का श्रृंगार करें।
रात में शुभ मुहूर्त में पंचामृत से अभिषेक करें।
माखन-मिश्री, फल और पंजीरी का भोग लगाएं।
श्रीकृष्ण जन्म के बाद आरती और मंत्र जाप करें।
जन्माष्टमी का महत्व
धार्मिक मान्यता है कि जन्माष्टमी के दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक व्रत रखने तथा मध्यरात्रि में श्रीकृष्ण की पूजा करने से सुख, समृद्धि और मनोकामनाओं की प्राप्ति होती है। इस दिन दान-पुण्य और भक्ति का भी विशेष महत्व बताया गया है।






