भारतीय टेलीविजन के लोकप्रिय क्राइम शो ‘CID’ को बनाने वाले दिग्गज निर्माता-निर्देशक बी.पी. सिंह का 77 साल की उम्र में निधन हो गया है। उनके निधन की खबर से मनोरंजन जगत में शोक की लहर है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, मंगलवार सुबह उन्हें गंभीर हार्ट अटैक आया था। ‘CID’ के अलावा उन्होंने हॉरर शो ‘आहट’ के जरिए भी दर्शकों के बीच खास पहचान बनाई। आखिर कौन थे बी.पी. सिंह और कैसे उन्होंने टीवी की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई? आगे पढ़ें पूरी खबर।

हार्ट अटैक से हुआ निधन
बी.पी. सिंह का पूरा नाम बृजेंद्र पाल सिंह था। 27 अक्टूबर 2026 को 77 साल की उम्र में उनका निधन हो गया। फिल्म निर्माता अशोक पंडित ने उनके निधन की जानकारी साझा करते हुए दुख जताया। रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्हें सुबह गंभीर हार्ट अटैक आया था।
अशोक पंडित ने उन्हें एक शानदार फिल्मकार और करीबी दोस्त बताते हुए कहा कि ‘CID’ और ‘आहट’ जैसे शो के जरिए उन्होंने देशभर के दर्शकों को बांधे रखा। उनके मुताबिक, बी.पी. सिंह का काम आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा। उनके अंतिम संस्कार की तारीख 28 अक्टूबर बताई गई है।
‘CID’ से घर-घर में मिली पहचान
बी.पी. सिंह को सबसे ज्यादा लोकप्रियता क्राइम इन्वेस्टिगेशन शो ‘CID’ से मिली। साल 1998 में शुरू हुए इस धारावाहिक ने भारतीय टेलीविजन पर अपनी अलग जगह बनाई। शो में अपराधों की गुत्थियां सुलझाने वाली कहानियों और यादगार किरदारों ने दर्शकों को लंबे समय तक जोड़े रखा।
‘ACP प्रद्युम्न’, ‘इंस्पेक्टर दया’ और ‘इंस्पेक्टर अभिजीत’ जैसे किरदारों की लोकप्रियता में इस शो की बड़ी भूमिका रही। बी.पी. सिंह ने इस धारावाहिक के निर्माण और निर्देशन में अहम भूमिका निभाई। वह शो में DCP शमशेर सिंह चितरोले के किरदार में भी नजर आए थे।
हॉरर शो ‘आहट’ से भी किया दर्शकों को प्रभावित
‘CID’ के अलावा बी.पी. सिंह का नाम लोकप्रिय हॉरर शो ‘आहट’ से भी जुड़ा रहा। साल 1995 में शुरू हुए इस शो ने डर और रहस्य से भरी कहानियों के जरिए दर्शकों के बीच खास जगह बनाई। इसकी अलग-अलग कहानियों और सस्पेंस ने इसे लंबे समय तक लोकप्रिय बनाए रखा।
क्राइम और हॉरर, दोनों तरह के कार्यक्रमों में उनकी पकड़ ने उन्हें टेलीविजन की दुनिया के प्रमुख निर्माता-निर्देशकों में शामिल किया।
दूरदर्शन से शुरू हुआ था सफर
बी.पी. सिंह ने अपने करियर की शुरुआत साल 1973 में दूरदर्शन में समाचार कैमरामैन के रूप में की थी। उन्होंने पुणे स्थित फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (FTII) से पढ़ाई की थी। कैमरे के पीछे काम करने के अनुभव ने उनके निर्देशन और दृश्य प्रस्तुति की समझ को मजबूत किया।
बाद में उन्होंने टेलीविजन की दुनिया में कदम बढ़ाया और अपराध तथा रहस्य पर आधारित कार्यक्रमों के जरिए अपनी पहचान बनाई। दूरदर्शन के धारावाहिक ‘एक शून्य शून्य’ और अन्य टीवी परियोजनाओं में भी उनका योगदान रहा।
FTII और टेलीविजन जगत में भी निभाई अहम भूमिका
बी.पी. सिंह का योगदान केवल धारावाहिकों के निर्माण तक सीमित नहीं था। वह फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया की गवर्निंग काउंसिल के अध्यक्ष भी रह चुके थे। उन्होंने भारतीय फिल्म एवं टेलीविजन निर्देशक संघ में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
उनके निधन पर फिल्म और टेलीविजन जगत से जुड़े लोगों ने दुख व्यक्त किया। उनके काम ने क्राइम और हॉरर शोज की ऐसी पहचान बनाई, जिसे दर्शक लंबे समय तक याद रखेंगे।
भारतीय टेलीविजन के लिए बड़ी क्षति
बी.पी. सिंह ने अपने लंबे करियर में ऐसे धारावाहिक दिए, जो कई वर्षों तक दर्शकों की पसंद बने रहे। ‘CID’ की जांच-पड़ताल और ‘आहट’ के डरावने किस्सों ने उन्हें अलग पहचान दिलाई। उनके निधन से भारतीय टेलीविजन ने एक अनुभवी निर्माता और निर्देशक को खो दिया है। उनके बनाए कार्यक्रम दर्शकों के बीच उनकी विरासत के रूप में याद किए जाते रहेंगे।






