पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में हाल के दिनों में हिंसा ने गंभीर रूप ले लिया है। स्थानीय नागरिक संगठन जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) और कई प्रत्यक्षदर्शियों का दावा है कि पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने शांतिपूर्ण और निहत्थे प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी की, जिसमें पिछले दो दिनों में कम से कम 30 लोगों की मौत हुई है। इन दावों के अनुसार कई लोग घायल भी हुए हैं।

प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि गोलीबारी के बाद सुरक्षा बल कुछ शव अपने साथ ले गए और अस्पतालों तक पहुंच सीमित कर दी गई, जिससे घटनाओं की स्वतंत्र पुष्टि करना मुश्किल हो गया। इसी दौरान क्षेत्र में इंटरनेट और मोबाइल सेवाओं पर भी प्रतिबंध लगाए जाने की खबरें सामने आई हैं।
बताया जा रहा है कि विरोध प्रदर्शन चुनावी सुधारों और स्थानीय राजनीतिक अधिकारों की मांग को लेकर चल रहे थे। प्रदर्शन का नेतृत्व कर रही JAAC का कहना है कि लोग लंबे समय से प्रशासनिक फैसलों के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं और हाल की कार्रवाई ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है।
दूसरी ओर, पाकिस्तान सरकार ने इन आरोपों से इनकार किया है। पाकिस्तान के अधिकारियों का कहना है कि सरकार का प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने से कोई संबंध नहीं है और उन्होंने अशांति के लिए बाहरी हस्तक्षेप को जिम्मेदार ठहराया है।
इस बीच, एमनेस्टी इंटरनेशनल ने संचार प्रतिबंध हटाने और घटना की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख भी पहले इस क्षेत्र में हुई हिंसा की जांच की अपील कर चुके हैं।
फिलहाल PoK में स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। मीडिया और स्वतंत्र पर्यवेक्षकों की सीमित पहुंच के कारण घटनाओं के सभी दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी संभव नहीं हो सकी है। इसलिए मृतकों की संख्या और अन्य आरोपों को लेकर अलग-अलग पक्ष अलग-अलग दावे कर रहे हैं।


