वॉशिंगटन/नई दिल्ली, 29 जुलाई। अमेरिका में रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। अमेरिकी सीनेट ने एक द्विदलीय (बाइपार्टिसन) प्रतिबंध विधेयक पर आगे बढ़ने के पक्ष में भारी बहुमत से मतदान किया है। इस विधेयक के तहत राष्ट्रपति को उन देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार दिया जा सकता है, जो बड़े पैमाने पर रूसी तेल और गैस खरीदते हैं। भारत और चीन उन प्रमुख देशों में शामिल हैं, जिनका इस संदर्भ में उल्लेख किया जा रहा है।
प्रस्तावित कानून का उद्देश्य रूस की तेल और गैस से होने वाली आय को कम करना है, ताकि यूक्रेन युद्ध के लिए उसकी आर्थिक क्षमता पर दबाव बनाया जा सके। विधेयक में रूस के अधिकारियों, बैंकों, तथाकथित “शैडो फ्लीट” और प्रतिबंधों से बचने में मदद करने वाले नेटवर्क पर भी सख्त कार्रवाई का प्रावधान है।

हालांकि यह स्पष्ट करना जरूरी है कि भारत पर अभी 100% टैरिफ नहीं लगाया गया है। फिलहाल अमेरिकी सीनेट ने विधेयक को आगे बढ़ाने के लिए प्रक्रिया संबंधी मतदान किया है। इसे कानून बनने के लिए सीनेट की आगे की प्रक्रिया, प्रतिनिधि सभा (हाउस) और अंततः राष्ट्रपति की मंजूरी से गुजरना होगा। तभी किसी देश पर टैरिफ लागू करने का फैसला लिया जा सकेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह कानून लागू होता है और भारत पर टैरिफ लगाया जाता है, तो दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों और भारत के निर्यात पर असर पड़ सकता है। वहीं भारत अब तक यह कहता रहा है कि वह अपनी ऊर्जा सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर तेल खरीद से जुड़े फैसले लेता है।
फिलहाल पूरी दुनिया की नजर अमेरिकी कांग्रेस की अगली कार्रवाई पर टिकी है। यदि यह विधेयक कानून बनता है, तो रूस के साथ व्यापार करने वाले कई देशों के लिए नई आर्थिक चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं।


