नई दिल्ली, 29 जुलाई। दिल्ली में जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी (GPA) के जरिए होने वाली प्रॉपर्टी की खरीद-बिक्री पर सरकार सख्ती की तैयारी कर रही है। सरकार का उद्देश्य फर्जी संपत्ति सौदों, भू-माफियाओं की गतिविधियों और स्टांप ड्यूटी चोरी पर रोक लगाना है। इसके लिए राजस्व विभाग ने प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को और कड़ा करने के निर्देश जारी किए हैं।
नियमों के तहत रजिस्ट्रेशन के लिए आने वाले हर GPA दस्तावेज की जांच की जाएगी। यदि किसी GPA का इस्तेमाल वास्तव में संपत्ति की बिक्री या स्वामित्व हस्तांतरण के लिए किया जा रहा है, तो उसे केवल साधारण पावर ऑफ अटॉर्नी नहीं माना जाएगा। ऐसे मामलों में पूरा मामला कलेक्टर ऑफ स्टांप्स के पास भेजा जाएगा, जहां यह तय होगा कि उस पर बिक्री विलेख (Sale Deed) के बराबर स्टांप ड्यूटी लागू होगी या नहीं।
सरकार का कहना है कि कई मामलों में लोग कम स्टांप ड्यूटी देकर GPA के जरिए संपत्ति बेच देते हैं, जिससे सरकार को राजस्व का नुकसान होता है और भविष्य में मालिकाना हक को लेकर विवाद भी पैदा होते हैं। नई व्यवस्था का उद्देश्य ऐसी अनियमितताओं को रोकना और पारदर्शी रजिस्ट्रेशन सुनिश्चित करना है।
हालांकि, करीबी रक्त संबंधियों—जैसे पति-पत्नी, माता-पिता, बेटे-बेटी या भाई-बहन—को संपत्ति के प्रबंधन या अन्य वैध कार्यों के लिए दिए जाने वाले वास्तविक GPA पर यह व्यवस्था अलग तरीके से लागू होगी। सरकार का जोर उन मामलों पर है, जहां GPA का उपयोग कथित तौर पर छिपी हुई बिक्री के लिए किया जाता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस कदम से प्रॉपर्टी बाजार में पारदर्शिता बढ़ेगी, फर्जीवाड़े पर अंकुश लगेगा और खरीदारों को अधिक कानूनी सुरक्षा मिलेगी। साथ ही, सरकार को स्टांप ड्यूटी से होने वाले राजस्व में भी बढ़ोतरी की उम्मीद है।



