उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर बड़ा सियासी बदलाव देखने को मिला है। बीजेपी के पूर्व सांसद धर्मेंद्र कश्यप ने समाजवादी पार्टी का दामन थाम लिया है। लखनऊ में सपा प्रमुख अखिलेश यादव से मुलाकात के बाद उनके इस फैसले ने आगामी विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक चर्चाओं को तेज कर दिया है। आखिर इस बदलाव के पीछे क्या वजह है और आंवला की राजनीति पर इसका क्या असर पड़ सकता है? आगे पढ़ें पूरी खबर।

बीजेपी छोड़कर सपा में शामिल हुए धर्मेंद्र कश्यप
उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक हलचल तेज होती नजर आ रही है। इसी बीच भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के पूर्व सांसद धर्मेंद्र कश्यप ने समाजवादी पार्टी (सपा) का दामन थाम लिया है। 11 अक्टूबर 2026 को उन्होंने लखनऊ में सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से मुलाकात की और पार्टी की सदस्यता ग्रहण की।
इस मुलाकात के दौरान धर्मेंद्र कश्यप की बेटी कीर्ति कश्यप, सपा के बरेली जिलाध्यक्ष शुभलेश यादव और वरिष्ठ नेता वीरपाल सिंह यादव भी मौजूद रहे। इस घटनाक्रम को पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
कौन हैं धर्मेंद्र कश्यप?
धर्मेंद्र कश्यप बरेली जिले की आंवला लोकसभा सीट से दो बार सांसद रह चुके हैं। उन्होंने 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी के टिकट पर जीत दर्ज की थी। हालांकि, 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्हें समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार नीरज मौर्य के हाथों हार का सामना करना पड़ा।
धर्मेंद्र कश्यप का राजनीतिक सफर अलग-अलग दलों से जुड़ा रहा है। वह पहले बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी से भी जुड़े रहे। बाद में उन्होंने बीजेपी का दामन थामा और लगातार दो लोकसभा चुनाव जीतकर संसद पहुंचे।
क्यों नाराज थे धर्मेंद्र कश्यप?
धर्मेंद्र कश्यप के बीजेपी छोड़ने से पहले ही उनके अगले राजनीतिक कदम को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई थीं। पार्टी की राज्यसभा उम्मीदवारों की सूची सामने आने के बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर ‘टाटा-बाय-बाय’ लिखा था। इसके बाद उनके बीजेपी से अलग होने की अटकलें तेज हो गईं।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, धर्मेंद्र कश्यप पार्टी में उचित सम्मान और पिछड़े व अति पिछड़े वर्गों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिलने को लेकर नाराज थे। उन्होंने पार्टी के कुछ नेताओं पर भी सवाल उठाए थे। हालांकि, उनके फैसले के पीछे के सभी कारणों को केवल एक घटना से जोड़कर देखना उचित नहीं होगा।
बेटी कीर्ति कश्यप को लेकर भी चर्चा
धर्मेंद्र कश्यप के सपा में शामिल होने के बाद उनकी बेटी कीर्ति कश्यप की राजनीतिक भूमिका को लेकर भी चर्चा हो रही है। कुछ मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि उन्हें आगामी विधानसभा चुनाव में सपा के टिकट पर उतारने की तैयारी हो सकती है।
हालांकि, उनकी उम्मीदवारी और सीट को लेकर किसी अंतिम फैसले की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में इस संभावना को फिलहाल राजनीतिक चर्चा के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।
आंवला और बरेली की राजनीति पर क्या पड़ेगा असर?
धर्मेंद्र कश्यप का समाजवादी पार्टी में शामिल होना आंवला और बरेली क्षेत्र की राजनीति में महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। दो बार सांसद रह चुके धर्मेंद्र कश्यप का स्थानीय राजनीतिक अनुभव और समर्थकों के बीच उनकी पकड़ सपा के लिए उपयोगी हो सकती है।
दूसरी ओर, बीजेपी के लिए यह घटनाक्रम राजनीतिक चुनौती बन सकता है। हालांकि, इसका वास्तविक असर आगामी चुनावों में ही स्पष्ट होगा। यह देखना दिलचस्प होगा कि धर्मेंद्र कश्यप का यह फैसला क्षेत्र के राजनीतिक समीकरणों और दोनों दलों की चुनावी रणनीति को किस तरह प्रभावित करता है
निष्कर्ष
धर्मेंद्र कश्यप के बीजेपी छोड़कर समाजवादी पार्टी में शामिल होने से उत्तर प्रदेश की राजनीति में नई चर्चा शुरू हो गई है। अब सभी की नजरें सपा में उनकी आगामी भूमिका और आंवला क्षेत्र के राजनीतिक समीकरणों पर टिकी हैं। आने वाले दिनों में इस बदलाव से जुड़े और भी राजनीतिक घटनाक्रम सामने आ सकते हैं।






