पटना, 29 जुलाई। बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की टीआरई-3 (शिक्षक भर्ती परीक्षा) पेपर लीक मामले में आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एमबीबीएस डॉक्टर मनीष कुमार को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसी के अनुसार, इस गिरफ्तारी के साथ मामले में अब तक 296 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है।

ईओयू के मुताबिक, जांच में सामने आया है कि डॉ. मनीष कुमार का संबंध कथित पेपर लीक नेटवर्क से था। उन पर आरोप है कि परीक्षा से पहले उन्होंने लगभग 30 अभ्यर्थियों को झारखंड के हजारीबाग ले जाकर लीक प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने की साजिश में भूमिका निभाई। बदले में उन्हें प्रति अभ्यर्थी रकम मिलने की बात भी जांच में सामने आई है।
जांच एजेंसी का कहना है कि डॉ. मनीष के कथित संबंध संजीव मुखिया गिरोह से जुड़े लोगों से थे। ईओयू इस पूरे नेटवर्क की वित्तीय लेन-देन, संपर्कों और अन्य आरोपियों से जुड़े सबूतों की भी जांच कर रही है।
हालांकि, सोशल मीडिया और कुछ पोस्टों में यह दावा किया जा रहा है कि डॉ. मनीष सीलबंद प्रश्नपत्रों के बक्से खोलने और दोबारा सील करने के विशेषज्ञ थे, लेकिन इस दावे की पुष्टि ईओयू की आधिकारिक जानकारी में नहीं हुई है। अब तक एजेंसी ने उनकी गिरफ्तारी को प्रश्नपत्र लीक की कथित साजिश और अभ्यर्थियों तक पेपर पहुंचाने के आरोपों से जोड़ा है।
ईओयू का कहना है कि पेपर लीक नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश जारी है और मामले में आगे भी कई अहम खुलासे हो सकते हैं। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि भर्ती परीक्षा की गोपनीयता कैसे भंग हुई और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही।


