भोपाल, 29 जुलाई। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने महाकाल मंदिर (उज्जैन) से अयोध्या स्थित राम मंदिर तक पदयात्रा निकालने का ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि यह यात्रा 2 अक्टूबर (गांधी जयंती) से शुरू होगी और इसका उद्देश्य राम मंदिर के लिए मिले चढ़ावे और दान में कथित अनियमितताओं के मामले में जवाबदेही तय कराना है।
दिग्विजय सिंह का कहना है कि करोड़ों श्रद्धालुओं ने भगवान राम के नाम पर आस्था के साथ दान दिया था, इसलिए यदि दान के उपयोग या चढ़ावे को लेकर किसी तरह की अनियमितता के आरोप सामने आए हैं, तो उनकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने दावा किया कि उनकी पदयात्रा गैर-राजनीतिक होगी और इसका उद्देश्य केवल श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े सवाल उठाना है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि उन्होंने स्वयं राम मंदिर निर्माण के लिए ₹1.11 लाख का दान दिया था। उन्होंने घोषणा की कि वह अयोध्या की अदालत में याचिका दायर कर अपने दान के उपयोग का हिसाब मांगेंगे। यदि अदालत वित्तीय अनियमितता पाती है, तो वे अपनी दान राशि वापस लेकर किसी अन्य धार्मिक ट्रस्ट को दान करने की मांग करेंगे।
दूसरी ओर, भाजपा और राम मंदिर से जुड़े पक्षों ने दिग्विजय सिंह के आरोपों को राजनीतिक बताया है। इस मुद्दे पर अलग-अलग राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। दान में कथित अनियमितताओं के आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष किसी सक्षम जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा।


