
भारतीय ज्ञान परंपरा और संस्कृत को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ी पहल की गई है।
अब विश्वविद्यालय के ऑनलाइन संस्कृत प्रशिक्षण केंद्र के माध्यम से दाखिले से लेकर पढ़ाई, परीक्षा और प्रमाणपत्र तक की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी। यानी देश ही नहीं, विदेश में रहने वाले भारतीय भी घर बैठे इन पाठ्यक्रमों का हिस्सा बन सकेंगे।
विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य सिर्फ संस्कृत भाषा का प्रचार-प्रसार करना नहीं, बल्कि रोजगारपरक शिक्षा को भी बढ़ावा देना है। खास बात यह है कि यह सुविधा महिलाओं, नौकरीपेशा लोगों, ग्रामीण क्षेत्रों के छात्रों और भारतीय संस्कृति में रुचि रखने वाले लोगों के लिए काफी उपयोगी मानी जा रही है।
अब बात करते हैं कि आखिर इन कोर्सों में क्या-क्या पढ़ाया जाएगा…
प्रमाणपत्र पाठ्यक्रमों में कर्मकांड, ज्योतिष एवं कुंडली विज्ञान, वास्तु विज्ञान, संस्कृत संभाषण, योग और पाली जैसे विषय शामिल किए गए हैं। वहीं वार्षिक डिप्लोमा कोर्स में भी कर्मकांड और ज्योतिष की पढ़ाई कराई जाएगी।
सबसे अच्छी बात… इन कोर्सों की फीस भी काफी किफायती रखी गई है। सर्टिफिकेट कोर्स की फीस 1500 रुपये और डिप्लोमा कोर्स की फीस 2000 रुपये निर्धारित की गई है।
विश्वविद्यालय के अनुसार, वर्ष 2023 में केंद्र की स्थापना के बाद से अब तक 5,000 से अधिक छात्र देश-विदेश से इन पाठ्यक्रमों का लाभ उठा चुके हैं।
तो अगर आप भी भारतीय संस्कृति, संस्कृत और पारंपरिक ज्ञान को सीखना चाहते हैं, तो यह आपके लिए एक शानदार अवसर हो सकता है।


