अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे और दान की रकम में कथित हेराफेरी के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को अहम फैसला सुनाया। अदालत ने मामले की जांच CBI को सौंपने का आदेश नहीं दिया और याचिकाओं का निपटारा करते हुए सुनवाई आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी स्थानीय मजिस्ट्रेट को दी। हालांकि, याचिकाकर्ताओं को ट्रायल कोर्ट में अपनी बात रखने और जांच में सहायता करने की अनुमति दी गई है। आखिर अदालत ने यह फैसला क्यों लिया और जांच में अब तक क्या सामने आया है? आगे पढ़ें पूरी खबर।

CBI जांच की मांग वाली याचिकाओं का निपटारा
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने मामले की सुनवाई की। पीठ में जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना भी शामिल थे। उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि विशेष जांच दल (SIT) इस मामले में चार्जशीट दाखिल कर चुका है।
सरकार की ओर से दी गई जानकारी को ध्यान में रखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाओं का निपटारा कर दिया और संबंधित न्यायिक मजिस्ट्रेट को कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई करने का निर्देश दिया।
दान की रकम की गिनती के दौरान हुई कथित हेराफेरी
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि SIT की जांच में दान की रकम की गिनती के दौरान कथित गड़बड़ी सामने आई है। उनके अनुसार, रकम गिनने की जिम्मेदारी संभाल रहे कुछ लोगों ने पैसे निकालकर बैंक खातों में जमा किए या संपत्तियों में निवेश किए।
सरकार ने अदालत को यह भी बताया कि आरोपियों के बैंक खातों और संपत्तियों की जांच की गई है। मंदिर में मिले चढ़ावे और कीमती वस्तुओं का ऑडिट भी कराया गया है। सरकार के मुताबिक, जांच में इन वस्तुओं का हिसाब सही पाया गया।
SIT को मिले 105 संदिग्ध मामले, 8 आरोपी बनाए गए
जांच से जुड़ी रिपोर्ट के अनुसार, दान की रकम गिनने वाले कक्ष से कथित तौर पर नकदी हटाने या छिपाने के 105 मामले सामने आए। SIT ने इस मामले में आठ आरोपियों की पहचान की। उनके बैंक खातों, वित्तीय लेन-देन और चल-अचल संपत्तियों की भी जांच की गई।
इन आठ आरोपियों के खिलाफ 23 सितंबर को अयोध्या की अदालत में चार्जशीट दाखिल की गई थी।
याचिकाकर्ताओं को ट्रायल कोर्ट में पक्ष रखने की अनुमति
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मामले में जनहित का पहलू भी जुड़ा है। इसलिए याचिकाकर्ताओं को स्थानीय मजिस्ट्रेट के सामने चलने वाली कार्यवाही में कानून के दायरे में रहकर सहायता करने की अनुमति दी गई है।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि उसके आदेश को मामले के आरोपों के सही या गलत होने पर कोई टिप्पणी नहीं माना जाए। सुप्रीम कोर्ट ने मामले के गुण-दोष पर कोई राय नहीं दी है। अब आगे की सुनवाई अयोध्या की संबंधित अदालत में होगी।





