हरियाणा के जींद जिले के करसिंधू गांव की बेटी साक्षी शर्मा ने अपनी मेहनत और जुनून से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन कर दिया है। कभी बारिश और रात के अंधेरे में घर की छत पर कबड्डी का अभ्यास करने वाली साक्षी ने अब कॉमनवेल्थ कबड्डी चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया है। उनकी इस उपलब्धि से परिवार ही नहीं, पूरा गांव गर्व से झूम उठा है। आखिर कैसे सीमित संसाधनों के बीच साक्षी ने यह मुकाम हासिल किया? आगे पढ़ें पूरी खबर।

फाइनल में 9 अंक लेकर भारत को दिलाया गोल्ड
अहमदाबाद में 23 से 31 अक्टूबर तक आयोजित कॉमनवेल्थ कबड्डी चैंपियनशिप 2026 में भारतीय महिला टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया। 31 अक्टूबर को खेले गए फाइनल मुकाबले में भारत ने युगांडा को 35-15 से हराया।
इस मुकाबले में साक्षी शर्मा ने शानदार रेडिंग करते हुए 10 में से 9 सफल रेड लगाईं और 9 अंक हासिल किए। पूरे टूर्नामेंट में उन्होंने 6 मुकाबलों में कुल 52 अंक जुटाए और प्रतियोगिता की सर्वश्रेष्ठ स्कोरर बनीं।
बारिश में छत पर करती थीं अभ्यास
साक्षी की सफलता के पीछे वर्षों की मेहनत और संघर्ष छिपा है। उनके पिता चूड़िया राम खेती करते हैं और परिवार के पास लगभग एक एकड़ जमीन है। आर्थिक संसाधन सीमित होने के बावजूद परिवार ने बेटी के सपनों को पूरा करने में उसका साथ दिया।
साक्षी को बचपन से ही कबड्डी का शौक था। वह बारिश और रात के अंधेरे में भी अभ्यास करना नहीं छोड़ती थीं। कई बार घर की पक्की छत पर ही कबड्डी की बारीकियां सीखती रहीं। इसी लगन और लगातार मेहनत ने उन्हें आज इस मुकाम तक पहुंचाया है।
बड़ी स्क्रीन पर पूरा गांव देख रहा था मुकाबला
साक्षी के फाइनल मुकाबले को देखने के लिए करसिंधू गांव में बड़ी स्क्रीन लगाई गई थी। परिवार और ग्रामीण एक साथ बैठकर भारतीय टीम का मुकाबला देख रहे थे। जैसे ही भारत ने युगांडा को हराकर गोल्ड जीता, गांव में खुशी की लहर दौड़ गई। लोगों ने आतिशबाजी कर जश्न मनाया।
घर लौटने पर चूरमा और दूध-दही से होगा स्वागत
साक्षी की मां कविता शर्मा बेटी की जीत से बेहद खुश हैं। उन्होंने बताया कि घर लौटने पर पूरे गांव की ओर से उसका स्वागत किया जाएगा। साक्षी को दूध, दही, मक्खन और देसी चूरमा पसंद है, इसलिए परिवार उसके लिए खास पकवान तैयार करेगा।
वहीं, परिवार की इच्छा है कि साक्षी आगे भी इसी तरह मेहनत करे और भविष्य में ओलंपिक जैसे बड़े मंच पर देश का प्रतिनिधित्व करे।
सीमित संसाधनों से अंतरराष्ट्रीय पहचान तक का सफर
साक्षी शर्मा की कहानी उन खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा है, जिनके पास संसाधन कम हैं, लेकिन सपने बड़े हैं। परिवार के सहयोग, लगातार अभ्यास और मजबूत इरादों के दम पर उन्होंने देश को कॉमनवेल्थ कबड्डी चैंपियनशिप का स्वर्ण पदक दिलाने में अहम भूमिका निभाई है।







