चंडीगढ़, 9 जुलाई। ( राजीव राठी ) अभिनेता और गायक दिलजीत दोसांझ अभिनीत फिल्म ‘सतलुज’ एक बार फिर सुर्खियों में है। फिल्म को भारत में OTT प्लेटफॉर्म से हटाए जाने के बाद विवाद लगातार गहराता जा रहा है। इस बीच पंजाब और दिल्ली के कई स्थानों पर सामाजिक, धार्मिक और कुछ राजनीतिक संगठनों द्वारा फिल्म की विशेष स्क्रीनिंग आयोजित की जा रही है। इन आयोजनों के जरिए समर्थकों का कहना है कि फिल्म में दिखाए गए विषय और ऐतिहासिक घटनाओं को लोगों तक पहुंचाया जाना चाहिए।
यह फिल्म मूल रूप से ‘Punjab 95’ नाम से बनाई गई थी और मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन पर आधारित बताई जाती है। रिलीज से पहले फिल्म को लंबे समय तक विभिन्न प्रक्रियाओं और विवादों का सामना करना पड़ा। बाद में इसका नाम बदलकर ‘सतलुज’ रखा गया और इसे OTT प्लेटफॉर्म ZEE5 पर रिलीज किया गया। हालांकि रिलीज के लगभग दो दिन बाद ही इसे भारत में प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया। प्लेटफॉर्म ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए फिल्म फिलहाल उपलब्ध नहीं रहेगी और मामले में आगे की प्रक्रिया जारी है।
फिल्म हटाए जाने के बाद सोशल मीडिया पर भी बहस तेज़ हो गई। बड़ी संख्या में दर्शकों ने इस फैसले पर सवाल उठाए, जबकि कुछ लोगों ने सरकार के कदम का समर्थन भी किया। इस बीच सरकार से जुड़े सूत्रों ने मीडिया को बताया कि कार्रवाई सुरक्षा संबंधी चिंताओं और सूचना प्रौद्योगिकी नियमों के तहत की गई। दूसरी ओर कई संगठनों ने फिल्म को फिर से उपलब्ध कराने की मांग उठाई है।
फिल्म के कलाकारों और लेखकों ने भी इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया दी है। उनका कहना है कि फिल्म को दर्शकों तक पहुंचाने के लिए लंबे समय तक प्रयास किए गए और इसे हटाए जाने से दर्शकों में निराशा है। फिल्म से जुड़े लोगों ने इसे किसी प्रचार अभियान का हिस्सा मानने से इनकार किया है और लोगों से केवल वैध माध्यमों से ही फिल्म देखने की अपील की है।
फिलहाल यह विवाद केवल एक फिल्म तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, OTT प्लेटफॉर्म पर सामग्री के नियमन और सुरक्षा संबंधी चिंताओं जैसे व्यापक मुद्दों पर भी चर्चा का विषय बन गया है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि फिल्म दोबारा भारत में उपलब्ध होती है या नहीं और इस पूरे मामले में आगे क्या निर्णय लिए जाते हैं।







