
जींद। हरियाणा की जींद जिला जेल में जेल सुपरिंटेंडेंट दीपक शर्मा की पहल पर कैदियों के पुनर्वास और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक अनूठा मिशन चलाया जा रहा है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य कैदियों को केवल सजा देना नहीं, बल्कि उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़कर एक जिम्मेदार नागरिक बनाना है।
जेल प्रशासन द्वारा कैदियों को विभिन्न कौशल विकास प्रशिक्षण दिए जा रहे हैं, जिनमें खेती, बागवानी, सिलाई, बढ़ईगिरी, हस्तशिल्प और अन्य रोजगारपरक कार्य शामिल हैं। इसके साथ ही उन्हें योग, ध्यान, नैतिक शिक्षा और काउंसलिंग के माध्यम से मानसिक रूप से मजबूत बनाने का भी प्रयास किया जा रहा है।
सुपरिंटेंडेंट दीपक शर्मा का कहना है कि यदि कैदियों को सही दिशा, रोजगार के अवसर और सकारात्मक माहौल मिले, तो वे अपराध की दुनिया छोड़कर सम्मानजनक जीवन जी सकते हैं। इसी सोच के साथ जेल में सुधारात्मक गतिविधियों को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है।
जेल प्रशासन का मानना है कि इस मिशन से कैदियों में अनुशासन, आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता की भावना विकसित हो रही है। कई कैदी नए कौशल सीखकर भविष्य में रोजगार के लिए भी खुद को तैयार कर रहे हैं।
यह पहल केवल जेल की चारदीवारी तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज को यह संदेश देती है कि सुधार का अवसर हर व्यक्ति को मिलना चाहिए। यदि ऐसे प्रयास सफल होते हैं, तो अपराध की पुनरावृत्ति कम करने में भी महत्वपूर्ण मदद मिल सकती है।






