वॉशिंगटन/चंडीगढ़, 9 जुलाई। ( राजीव राठी ) अमेरिका ने भारत से जुड़े कथित अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध नेटवर्क के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए कई लोगों पर गंभीर आपराधिक आरोप दर्ज किए हैं। अमेरिकी न्याय विभाग (DOJ) और संघीय जांच एजेंसी FBI द्वारा चलाए गए संयुक्त अभियान “ऑपरेशन हार्ड बॉल” के तहत अमेरिका, कनाडा और यूरोप में कई स्थानों पर छापेमारी की गई। अधिकारियों के अनुसार इस कार्रवाई में 24 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि कुल 37 आरोपियों के खिलाफ विभिन्न मामलों में अभियोग दायर किए गए हैं।
जांच एजेंसियों का आरोप है कि इन नेटवर्कों का संबंध भारत के कुछ संगठित अपराध गिरोहों से है, जिनकी गतिविधियां पंजाब सहित कई क्षेत्रों तक फैली हुई हैं। आरोपों में हत्या की साजिश, रंगदारी, मादक पदार्थों की तस्करी, हथियारों की तस्करी और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आपराधिक नेटवर्क संचालित करने जैसे गंभीर अपराध शामिल हैं। हालांकि इन आरोपों पर अंतिम फैसला संबंधित अदालतों द्वारा सुनवाई के बाद ही होगा।
अमेरिकी अभियोग में गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई, उसके सहयोगी गोल्डी बराड़ और कुछ अन्य कथित अपराधियों का भी उल्लेख किया गया है। अभियोजन पक्ष का दावा है कि इन नेटवर्कों ने भारत से बाहर भी अपने आपराधिक तंत्र का विस्तार किया और आधुनिक संचार माध्यमों के जरिए गतिविधियों का संचालन किया। दूसरी ओर संबंधित पक्षों को अदालत में अपना बचाव प्रस्तुत करने का पूरा अधिकार प्राप्त है।
इसी जांच के दौरान अमेरिकी एजेंसियों ने पंजाब पुलिस के एक अधिकारी पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। आरोप है कि उन्होंने कथित तौर पर एक अंतरराष्ट्रीय रंगदारी मामले में अपराधियों की सहायता की। इन आरोपों के सामने आने के बाद पंजाब पुलिस ने संबंधित अधिकारी को वर्तमान पद से हटाकर विभागीय जांच शुरू कर दी है। मामले की जांच जारी है और अभी किसी अदालत द्वारा दोष सिद्ध नहीं किया गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कार्रवाई दिखाती है कि संगठित अपराध अब केवल किसी एक राज्य या देश तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि कई देशों में फैले नेटवर्क के रूप में काम कर रहा है। ऐसे मामलों में विभिन्न देशों की जांच एजेंसियों के बीच सहयोग लगातार बढ़ रहा है ताकि सीमा पार संचालित अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सके।
फिलहाल यह मामला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है। आगे की कानूनी प्रक्रिया के दौरान अदालतों में प्रस्तुत साक्ष्यों और सुनवाई के आधार पर ही आरोपों की पुष्टि या खंडन होगा। भारतीय और अमेरिकी एजेंसियां मामले में आगे की जांच जारी रखे हुए हैं।







