दिल्ली की तस्वीर आने वाले वर्षों में पूरी तरह बदलने वाली है। राजधानी को आधुनिक, बेहतर कनेक्टिविटी और सुविधाओं से लैस शहर बनाने के लिए ‘दिल्ली मास्टर प्लान 2047’ का खाका सामने आया है। इस प्लान में नए घरों के निर्माण से लेकर पुराने फ्लैटों के पुनर्विकास, मेट्रो नेटवर्क के विस्तार और नए ट्रांजिट हब विकसित करने तक कई बड़े फैसले शामिल हैं।
देश की राजधानी के शहरी विकास को नई दिशा देने के लिए केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने ‘दिल्ली मास्टर प्लान 2047’ का अनावरण किया। इस दौरान दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। सरकार का फोकस बढ़ती आबादी की जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ लोगों को बेहतर और किफायती आवास उपलब्ध कराने पर है।

40 लाख तक नए घर, बढ़ेगा अफोर्डेबल हाउसिंग का दायरा
दिल्ली में बढ़ती आबादी और आवास की मांग को देखते हुए मास्टर प्लान के तहत करीब 30 से 40 लाख नए फ्लैट जोड़ने की तैयारी है। इनमें बड़ी संख्या किफायती आवासों की होगी। इससे दिल्ली में घर खरीदने या रहने के लिए नए विकल्प बढ़ सकते हैं।
50 साल पुराने फ्लैटों का होगा कायाकल्प
मास्टर प्लान में दिल्ली के पुराने आवासीय इलाकों के पुनर्विकास पर भी जोर दिया गया है। 50 साल से अधिक पुराने फ्लैटों का पुनर्निर्माण और पुनर्विकास किया जाएगा। पुराने भवनों की जगह आधुनिक सुविधाओं से लैस आवास तैयार किए जा सकेंगे। साथ ही सड़क, पार्किंग और अन्य शहरी सुविधाओं को भी बेहतर बनाने की योजना है।
695 KM तक पहुंचेगा दिल्ली का मेट्रो नेटवर्क
राजधानी की लाइफलाइन कही जाने वाली मेट्रो को भी बड़ा विस्तार मिलेगा। मौजूदा करीब 416 किलोमीटर के मेट्रो नेटवर्क को बढ़ाकर 695 किलोमीटर तक करने का लक्ष्य रखा गया है। नेटवर्क बढ़ने से दिल्ली और आसपास के इलाकों के बीच कनेक्टिविटी मजबूत होगी और सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा मिलेगा।
6 नए RRTS कॉरिडोर पर बढ़ेगी रफ्तार
मेट्रो के साथ-साथ RRTS नेटवर्क के विस्तार की भी तैयारी है। फिलहाल एक RRTS लाइन संचालित है, जबकि अब 6 नए रूट विकसित करने की योजना है। इससे दिल्ली और एनसीआर के प्रमुख शहरों के बीच तेज और सुविधाजनक सफर का विकल्प बढ़ेगा।
सराय काले खां से कश्मीरी गेट तक बड़े ट्रांजिट हब
मास्टर प्लान में दिल्ली के तीन प्रमुख ट्रांजिट हब—सराय काले खां, आनंद विहार और कश्मीरी गेट—को आधुनिक रूप देने की योजना है। इन केंद्रों पर मेट्रो, RRTS, बस और अन्य परिवहन साधनों के बीच बेहतर इंटरकनेक्टिविटी विकसित की जाएगी।
नरेला में 138 हेक्टेयर का एजुकेशन हब
दिल्ली को शिक्षा, रिसर्च और इनोवेशन का बड़ा केंद्र बनाने की दिशा में भी योजना तैयार की गई है। नरेला में 138 हेक्टेयर क्षेत्र में एजुकेशन हब विकसित किया जाएगा। यहां विश्वविद्यालयों, रिसर्च संस्थानों, स्किल डेवलपमेंट सेंटर और स्टार्टअप से जुड़ी सुविधाओं को बढ़ावा दिया जाएगा। इससे युवाओं के लिए शिक्षा, रिसर्च और रोजगार के नए अवसर तैयार होने की उम्मीद है।
इंडस्ट्रियल और लॉजिस्टिक्स हब से कारोबार को मिलेगी रफ्तार
दिल्ली में हाईवे, रेलवे और प्रमुख शहरी सड़कों से जुड़े आधुनिक इंडस्ट्रियल और लॉजिस्टिक्स हब विकसित करने की योजना है। यहां वेयरहाउस, डिस्ट्रीब्यूशन सेंटर और माल ढुलाई से जुड़ी सुविधाएं उपलब्ध होंगी। इससे सप्लाई चेन को मजबूत करने, माल की आवाजाही तेज करने और कारोबार की लागत कम करने में मदद मिल सकती है।
2047 तक नई पहचान बनाने की तैयारी
कुल मिलाकर ‘दिल्ली मास्टर प्लान 2047’ के जरिए राजधानी के आवास, परिवहन, शिक्षा, उद्योग और लॉजिस्टिक्स सेक्टर को एक साथ विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। अगर प्रस्तावित योजनाएं तय समय के अनुसार जमीन पर उतरती हैं, तो आने वाले वर्षों में दिल्ली की कनेक्टिविटी, आवास व्यवस्था और शहरी ढांचा मौजूदा स्वरूप से काफी अलग नजर आ सकता है।

